नई दिल्ली | विपक्षी दलों की ओर से चुनाव आयोग (Election Commission) पर लगातार आरोप लगाए जा रहे हैं, जिसके बाद आयोग ने अपना पक्ष सार्वजनिक किया है। आयोग ने साफ किया है कि उसके सभी निर्णय बहुमत (Majority) के आधार पर लिए गए हैं और केवल कुछ चुनिंदा नोट्स को उठाकर पूरे मामले को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है। यह बयान ऐसे समय आया है जब कुछ विपक्षी दलों ने आयोग पर पक्षपात और पारदर्शिता की कमी के आरोप लगाए थे।
आयोग ने क्या कहा?
चुनाव आयोग के मुताबिक, चुनाव आयुक्तों (Election Commissioners) के बीच मतभेद स्वाभाविक प्रक्रिया का हिस्सा हैं, लेकिन अंतिम निर्णय हमेशा बहुमत के आधार पर ही लिया जाता है। आयोग ने कहा कि कुछ लोग जानबूझकर अल्पमत (Minority) के नोट्स को उछालकर यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि आयोग में मतभेद है, जबकि वास्तविकता यह है कि सभी निर्णय प्रक्रिया के तहत बहुमत से हुए हैं। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि आंतरिक चर्चाओं और नोट्स को सार्वजनिक रूप से तोड़-मरोड़ कर पेश करना उचित नहीं है, क्योंकि इससे संवैधानिक संस्था की गरिमा पर असर पड़ता है।
विपक्ष के आरोप क्या हैं?
विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनाव आयोग ने कुछ मामलों में पारदर्शिता बरती नहीं और उसके फैसलों में एकतरफापन दिखा। कुछ दलों ने यह भी दावा किया कि आयोग के भीतर ही निर्णयों को लेकर असहमति है, जिसे छिपाया जा रहा है। इन आरोपों के बाद आयोग ने यह स्पष्टीकरण जारी किया है।
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क्यों अहम है यह बयान?
यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में चुनावी प्रक्रिया को लेकर बहस तेज है। आयोग का कहना है कि वह संवैधानिक दायित्व का पालन करते हुए स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध है। आयोग ने कहा कि किसी भी तरह के भ्रम (Confusion) को फैलाने वाली बातों से बचना चाहिए और सभी पक्षों को आयोग की प्रक्रियाओं पर भरोसा रखना चाहिए। फिलहाल, आयोग ने अपनी स्थिति साफ कर दी है और कहा है कि उसके सभी फैसले बहुमत और नियमों के तहत लिए गए हैं।