नई दिल्ली | 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit 2026) की अध्यक्षता करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने ग्लोबल साउथ (Global South) को लेकर एक बड़ा और स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि विकासशील देशों को अब सिर्फ ‘नियम मानने वाला’ (Rule Taker) नहीं, बल्कि ‘नियम बनाने वाला’ (Rule Shaper) बनना होगा। पीएम मोदी ने कहा कि ग्लोबल साउथ आज वैश्विक संकटों की फ्रंट रो (Front Row) में है, लेकिन डिसीजन मेकिंग (Decision Making) की बैक रो (Back Row) में है, और यह बदलना जरूरी है।
पीएम मोदी ने क्या कहा?
- Rule Taker से Rule Shaper: पीएम मोदी ने कहा, “हमें ग्लोबल साउथ को रूल टेकर से रूल शेपर बनाने के लिए प्रयास करने होंगे।” उन्होंने कहा कि भारत इस बदलाव की अगुआई करने के लिए तैयार है।
- ग्लोबल गवर्नेंस सुधार: उन्होंने कहा कि वर्तमान ग्लोबल गवर्नेंस (Global Governance) का ढांचा एक पिरामिड (Pyramid) की तरह है, जिसमें पावर और डिसीजन मेकिंग ऊपर केंद्रित है। उन्होंने इस ‘पिरामिड ऑफ प्रिविलेज’ (Pyramid of Privilege) को ‘प्लेटफॉर्म ऑफ पार्टनरशिप’ (Platform of Partnership) में बदलने की बात कही, जहाँ हर देश की आवाज और हिस्सेदारी हो।
- 10 प्रस्ताव: पीएम मोदी ने ‘ग्लोबल गवर्नेंस रिफॉर्म’ (Global Governance Reform) के लिए 10 प्रस्ताव तैयार करने का सुझाव दिया, जिसे अगले शिखर सम्मेलन तक ‘ब्रिक्स रिफॉर्म रोडमैप’ (BRICS Reform Roadmap) का रूप दिया जा सकता है।
- UNSC सुधार: उन्होंने कहा कि UN सिक्योरिटी काउंसिल (UNSC) में सुधार अब और टाला नहीं जा सकता और इस पर बातचीत को निश्चित समय सीमा और स्पष्ट परिणाम से जोड़ना होगा।
- सीफेरर नेटवर्क: उन्होंने ‘सीफेरर इमरजेंसी सपोर्ट नेटवर्क’ (Seafarer Emergency Support Network) बनाने का प्रस्ताव रखा, ताकि मुश्किल हालात में समुद्री कर्मचारियों को अलर्ट, मेडिकल सहायता और सुरक्षित निकाला जा सके।
- ब्रिक्स का 20वां साल: पीएम मोदी ने कहा कि ब्रिक्स अपने ‘कमिंग ऑफ एज’ (Coming of Age) के क्षण में है और अगले 20 वर्षों के लिए एक नए और महत्वाकांक्षी एजेंडे (Ambitious Agenda) पर काम करना होगा।
- किसी के खिलाफ नहीं: उन्होंने कहा कि ब्रिक्स किसी के विरुद्ध नहीं है, बल्कि सभी को साथ लेकर चलने की सोच के साथ आगे बढ़ता है। यह इशारा अमेरिका और पश्चिमी देशों के लिए एक संदेश माना जा रहा है।
क्या है ग्लोबल साउथ?
ग्लोबल साउथ कोई आधिकारिक संगठन नहीं है, बल्कि यह दुनिया के उन देशों के लिए इस्तेमाल होने वाला शब्द है, जो ऐतिहासिक रूप से पश्चिमी विकसित देशों की तुलना में आर्थिक और राजनीतिक रूप से कम प्रभावशाली रहे हैं। इसमें एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, कैरेबियन और प्रशांत क्षेत्र के कई विकासशील देश शामिल हैं, जैसे भारत, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया और कई अफ्रीकी देश। इनमें से कई देश औपनिवेशिक शासन से बाहर निकले और आज आर्थिक विकास, गरीबी, कर्ज और वैश्विक संस्थाओं में कम प्रतिनिधित्व जैसी चुनौतियों से जूझ रहे हैं।