जबलपुर | मध्य प्रदेश के जबलपुर में दुर्लभ और संरक्षित वन्यजीव पैंगोलिन की तस्करी से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने आरोपी देवीदीन उर्फ देवा विश्वकर्मा की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। आरोपी डिंडौरी जिले के रैपुरा गांव का निवासी है और उसके खिलाफ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 और भारतीय वन अधिनियम की धाराओं में मामला दर्ज है।
क्या है पूरा मामला?
स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (STSF) को 8 जून को गुप्त सूचना मिली थी। इसके बाद STSF की जबलपुर इकाई ने खमतरा-ढीमरखेड़ा रोड पर घेराबंदी कर चार लोगों को हिरासत में लिया। तलाशी के दौरान उनके पास से करीब 5 किलोग्राम पैंगोलिन के शल्क, एक कार और एक मोटरसाइकिल बरामद की गई।
पैंगोलिन भारत में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम की अनुसूची-1 के तहत संरक्षित है, जिसका अर्थ है कि इसे अत्यंत संकटग्रस्त प्रजाति माना जाता है और इसके शिकार, व्यापार या कब्जे पर सबसे कड़ी सजा का प्रावधान है। पैंगोलिन के शल्कों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवैध तस्करी होती है, जिसे गंभीर वन्यजीव अपराध माना जाता है।
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कोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को जमानत देने का कोई पर्याप्त आधार नहीं है, इसलिए उसकी नियमित जमानत याचिका खारिज की जाती है। STSF ने स्पष्ट किया है कि वन्यजीवों के अवैध शिकार और तस्करी के खिलाफ उसकी कार्रवाई जारी रहेगी और इस तरह के अपराधियों को बख्शा नहीं जाएगा।