नई दिल्ली | केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने नोकिया सॉल्यूशंस एंड नेटवर्क्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के दो वरिष्ठ कर्मचारियों के खिलाफ 19.33 करोड़ रुपये के कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) घोटाले का मामला दर्ज किया है। आरोप है कि दोनों अधिकारियों ने मिलीभगत से 94 फर्जी कर्मचारी खाते बनाकर उनमें EPF की राशि ट्रांसफर कर दी। यह धोखाधड़ी वर्ष 2023-24 के दौरान की गई।
कौन हैं आरोपी?
CBI ने अपनी प्राथमिकी (FIR) में वैभव वर्मा और कमाराजू मुत्याला को नामित आरोपी बनाया है। वैभव वर्मा कंपनी में पेरोल क्लस्टर लीड के पद पर थे, जबकि कमाराजू मुत्याला पेरोल मैनेजमेंट हेड के रूप में कार्यरत थे। इनके अलावा, कुछ अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों को भी मामले में आरोपी बनाया गया है।
कैसे हुआ खुलासा?
मामले का खुलासा तब हुआ जब कंपनी ने जुलाई 2023 में EPFO से अपनी एक्जेम्प्टेड स्थिति (जहां कंपनी अपना PF फंड खुद चलाती है) वापस लेने के लिए आवेदन किया। 1 सितंबर 2023 को कंपनी के अन-एक्जेम्प्टेड (जहां PF EPFO द्वारा संचालित होता है) होने के बाद, सभी पुराने सदस्यों का पैसा EPFO को ट्रांसफर किया गया। इसी दौरान EPFO की जोनल फ्रॉड रिस्क मैनेजमेंट कमेटी की जांच में 94 ऐसे लाभार्थी खाते मिले, जो वास्तविक नहीं थे। कंपनी ने भी अपनी फोरेंसिक ऑडिट में इन दोनों अधिकारियों को धोखाधड़ी से जुड़ा पाया।
क्या-क्या सबूत मिले?
फोरेंसिक जांच में कई महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य मिले:
- आरोपियों के लैपटॉप से हटाई गई सबमिशन फाइलें बरामद की गईं।
- कंपनी से जुड़े न होने वाले लोगों के विवरण वाले इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड मिले।
- फर्जी रोजगार सत्यापन और आधिकारिक लॉगिन का उपयोग कर नकली KYC मंजूर किए जाने के प्रमाण मिले।
क्या कार्रवाई हुई?
मामला सामने आने के बाद नोकिया ने दोनों कर्मचारियों को निलंबित कर दिया और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की। कंपनी ने पूरी जानकारी EPFO को दी, जिसके बाद EPFO की शिकायत पर CBI ने मामला दर्ज किया। CBI ने यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज किया है। नोकिया के प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी पारदर्शिता और नैतिकता के उच्चतम मानकों के लिए प्रतिबद्ध है और जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रही है। CBI अब पूरे मामले की गहन जांच कर रही है।