नई दिल्ली | पिछले महीने वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया था। अब भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA के संयुक्त मिशन NISAR सैटेलाइट ने इस भूकंप को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। सैटेलाइट डेटा के विश्लेषण से पता चला है कि इस भीषण भूकंप के कारण कई जगहों पर जमीन लगभग 60 सेंटीमीटर यानी 2 फीट तक खिसक गई, जिसके चलते राजधानी कराकस और ला गुएरा में भारी तबाही मची।
क्या है NISAR मिशन?
NISAR (NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar) एक अत्याधुनिक उपग्रह मिशन है, जो पृथ्वी की सतह में होने वाले सूक्ष्म से सूक्ष्म बदलावों को भी पकड़ने में सक्षम है। यह सैटेलाइट पृथ्वी की सतह को सीधे ऊपर से नहीं, बल्कि करीब 40 डिग्री के कोण से देखता है, जिससे वह जमीन के क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर, दोनों तरह के विस्थापन को रिकॉर्ड कर सकता है। इस मिशन के तहत भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट और भू-सतह में होने वाले अन्य बदलावों पर नज़र रखी जाती है।
कैसे किया गया खुलासा?
वैज्ञानिकों ने 24 जून को आए भूकंप से पहले और बाद में NISAR सैटेलाइट से ली गई पृथ्वी की तस्वीरों का अध्ययन किया। इसके लिए 13 और 18 जून की तस्वीरों की तुलना 25 और 30 जून को लिए गए डेटा से की गई। इस तुलना से भूकंप के बाद जमीन की सतह में हुए बदलावों का सटीक पता लगाया जा सका। वैज्ञानिकों ने जमीन की सतह में मामूली बदलावों को मापने के लिए ‘इंटरफेरोमेट्रिक सिंथेटिक अपर्चर रडार’ (InSAR) तकनीक का इस्तेमाल किया। यह पहली बार था जब किसी बड़े भूकंप के कारण जमीन की सतह में हुए बदलाव को मैप करने के लिए NISAR के ‘अर्जेंट रिस्पॉन्स सिस्टम’ का उपयोग किया गया।
2 फीट क्यों खिसकी धरती?
नासा की जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी (JPL) के भू-भौतिकीविद् एरिक फील्डिंग ने इस खुलासे की जानकारी देते हुए बताया कि भूकंप की फॉल्ट लाइन (दरार) समुद्र से होते हुए पूर्व की ओर बढ़ी और कराकस के उत्तर में स्थित इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास वापस तट पर आई। इस हिस्से के ठीक दक्षिण में जमीन का खिसकाव सबसे ज़्यादा – लगभग 60 सेंटीमीटर (2 फीट) रहा। एरिक के अनुसार, यही कारण है कि कराकस और ला गुएरा में इतनी व्यापक तबाही देखने को मिली।
भूकंप की तबाही
गौरतलब है कि 24 जून को उत्तरी वेनेजुएला में पहले 7.2 तीव्रता का भूकंप आया था, और इसके महज 39 सेकंड बाद ही 7.5 तीव्रता का एक और शक्तिशाली भूकंप आया। इन दोनों भूकंपों में 5,000 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी और करीब 16,700 लोग घायल हुए थे। कराकस और ला गुएरा के अलावा, त्रुजिलो, याराकुय, काराबोबो, अरागुआ और मिरांडा राज्य भी इस आपदा से बुरी तरह प्रभावित हुए थे।
NISAR डेटा का महत्व
ISRO-NASA के इस संयुक्त मिशन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि अत्याधुनिक तकनीक प्राकृतिक आपदाओं को समझने और उनसे निपटने में कितनी सहायक हो सकती है। इस डेटा से वैज्ञानिकों को यह समझने में काफी मदद मिली कि भूकंप के दौरान वास्तव में क्या हुआ और भविष्य में ऐसी आपदाओं से निपटने के लिए बेहतर योजना बनाने में भी यह उपयोगी होगा। NISAR का यह डेटा भू-वैज्ञानिकों को दुनिया भर में भूकंपीय गतिविधियों की बेहतर निगरानी और आपदा राहत प्रयासों में भी मदद करेगा।