मध्य प्रदेश में मोहन यादव सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य कैबिनेट ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल-2026 के ड्राफ्ट को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी है।
कैबिनेट की बैठक के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा, “आज कैबिनेट ने UCC बिल, 2026 को पूरे दिल से और सर्वसम्मति से मंज़ूरी दे दी है।”
20 जुलाई से सत्र में पेश होगा बिल
अब यह ड्राफ्ट 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया जाएगा। CM मोहन यादव ने कहा, “हमने इस दिशा में कदम बढ़ाया है और यह सुनिश्चित किया है कि बिल 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र में पेश किए जाने के लिए तैयार हो।”
उन्होंने कहा कि समानता हमेशा से भारतीय संस्कृति और मूल्यों का एक अहम हिस्सा रही है।
शादी का रजिस्ट्रेशन होगा जरूरी
UCC ड्राफ्ट के तहत शादी का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। पुरुषों के लिए शादी की उम्र 21 साल और महिलाओं के लिए 18 साल रहेगी।
यह कदम शादियों को कानूनी दायरे में लाने और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में उठाया गया है।
आदिवासी समुदायों को छूट
सबसे अहम बात यह है कि UCC आदिवासी समुदायों (अनुसूचित जनजातियों) को छोड़कर समाज के सभी वर्गों पर लागू होगा।
सरकार ने आदिवासियों की परंपराओं और रीति-रिवाजों को ध्यान में रखते हुए उन्हें इसके दायरे से बाहर रखा है।
कैसे तैयार हुआ ड्राफ्ट?
UCC का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए सरकार ने कई सदस्यों वाली एक कमेटी बनाई थी, जिसके प्रमुख सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जज रंजना प्रकाश देसाई थीं।
कमेटी ने समाज के सभी वर्गों से सुझाव लिए और उनके आधार पर यह ड्राफ्ट तैयार किया। रिपोर्ट में आदिवासियों को UCC से बाहर रखने की सिफारिश की गई थी।
किन मामलों पर किया गया अध्ययन?
पैनल को शादी, तलाक, गुज़ारा-भत्ता, विरासत, गोद लेने और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे अलग-अलग पर्सनल और पारिवारिक मामलों से जुड़ी मौजूदा व्यवस्थाओं का अध्ययन करने का काम सौंपा गया था।
पैनल ने जेंडर इक्वालिटी सुनिश्चित करने, प्रचलित रीति-रिवाजों का सम्मान करने, और संवैधानिक प्रावधानों का ध्यान रखने की दिशा में काम किया है।