15 जुलाई से भारत में आने वाली ब्रिटेन के सामानों की कीमत बहुत कम हो जाएगी, क्योंकि सरकार ने FTA (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट) का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इसके तहत कहा गया है कि 15 जुलाई से भारत-ब्रिटेन के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट लागू होगा।
यह नोटिफिकेशन विदेश व्यापार महानिदेशालय (Directorate General of Foreign Trade) ने ब्रिटेन से इंपोर्ट होने वाली कारों पर लागू होने वाले टैरिफ रेट कोटा को लेकर किया है।
लग्जरी कारों के दाम में 80% तक की कटौती
15 जुलाई से एफटीए लागू होने के बाद ब्रिटेन से कार, व्हिस्की समेत अन्य उत्पादों के दाम में भारी कटौती होगी। खासकर कारों के दाम में 80 फीसदी तक कटौती हो सकती है।
इसका मतलब है कि ब्रिटेन से इम्पोर्ट होने वाली लैंड रोवर, जगुआर, Rolls Royce और एस्टन मार्टिन जैसी कारें सस्ती कीमतों पर मिल सकेंगी।
किन कारों पर कितनी घटेगी ड्यूटी?
भारत-यूके एफटीए डील के तहत पहले साल 20,000 कारें कम ड्यूटी पर इंपोर्ट हो सकती हैं।
3000cc+ (पेट्रोल) से 2500cc+ (डीजल) की 10,000 कारें इंपोर्ट होंगी। जिनकी कस्टम ड्यूटी 110% से घटकर 30% हो जाएगी।
1500cc से 3000cc तक की 5,000 कारें इंपोर्ट की जा सकती हैं। इन कारों पर इम्पोर्ट ड्यूटी 66 फीसदी से घटकर 50 फीसदी होगी। बाद में इसे धीरे-धीरे करके कम किया जाएगा और 15 साल बाद कस्टम ड्यूटी को 10 फीसदी पर लाया जाएगा।
कौन-कौन सी कारें होंगी सस्ती?
इस कैटेगरी में प्रीमियम और सुपर लग्जरी कारें शामिल हैं। लैंड रोवर रेंज रोवर, रेंज रोवर स्पोर्ट, लैंड रोवर डिफेंडर, कॉन्टिनेंटल GT, बेंटायगा, वैंटेज और डीबी12 जैसी कारें सस्ती होंगी।
रोल्स-रॉयस की फैंटम, घोस्ट और कलिनन जैसी गाड़ियों की कीमतों में 80 फीसदी तक की गिरावट आ सकती है।
स्कॉच व्हिस्की भी होगी सस्ती
भारत में अभी स्कॉच व्हिस्की पर 150 फीसदी का टैरिफ लगाया जाता है, लेकिन अब एफटीए के लागू होने के बाद इसके प्राइस में कटौती की जाएगी।
इस पर ड्यूटी कई किस्तों में कट करके 40 फीसदी तक लाया जाएगा। इसका मतलब है कि धीरे-धीरे स्कॉच व्हिस्की के दाम 110 फीसदी तक कम हो जाएंगे।
भारतीय उत्पादों को भी फायदा
भारत के सामानों को यूके में ड्यूटी फ्री किया जाएगा। टेक्सटाइल गारमेंट पर यूके में 12% की ड्यूटी लगती है। केमिकल्स पर 8 फीसदी, बेस मेटल्स पर 10 फीसदी की ड्यूटी लगती है, लेकिन अब इस डील से 99 फीसदी वस्तुएं यूके में ‘0%’ के तहत आएंगी।
इससे भारतीय निर्यातकों को बड़ा फायदा होगा और दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ेगा।