रात के अंधेरे में सड़क पर हाथ में बोतल थामे घूमते मरीज को देख राहगीर दंग रह गए। फुल पिपलिया निवासी आदित्य मारकंडे को पथरी का तेज दर्द उठा था।
परिजन उन्हें आनन-फानन में इलाज के लिए खंडवा जिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे, जहां उन्हें वार्ड में भर्ती कर सलाइन चढ़ाई जा रही थी।
आधी रात को बेड खाली करने का आदेश
पीड़ित आदित्य का आरोप है कि अभी उनका उपचार पूरा भी नहीं हुआ था और ड्रिप चल ही रही थी कि ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर और स्टॉफ ने उन्हें आधी रात को बेड खाली करने को कह दिया।
मरीज ने विरोध करते हुए कहा कि उनकी सलाइन अभी खत्म नहीं हुई है और दर्द भी पूरी तरह ठीक नहीं हुआ है, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने उनकी एक न सुनी और उन्हें बाहर जाने को कह दिया।
ड्रिप लगे हाथ के साथ सड़क पर
जिला अस्पताल स्टॉफ के इस अमानवीय व्यवहार से आहत और गुस्से में आकर मरीज आदित्य हाथ में ग्लूकोज की बोतल और नस में लगी सुई के साथ ही वार्ड से बाहर निकल आए।
आधी रात को इस हालत में मरीज अस्पताल परिसर से बाहर मुख्य सड़क पर पहुंच गया।
राहगीरों की भीड़ जमा हुई
सड़क पर मरीज को इस बेबसी की हालत में देखकर वहां से गुजरने वाले लोगों और स्थानीय निवासियों की भीड़ जुट गई।
प्रत्यक्षदर्शियों ने मरीज को समझाने का प्रयास किया और वापस अस्पताल लौटकर इलाज पूरा कराने की सलाह दी।
मरीज ने लौटने से किया इनकार
मरीज डॉक्टरों के तानाशाही पूर्ण रवैये और अस्पताल की कार्यप्रणाली से इस कदर नाराज और आहत था कि वह किसी भी सूरत में वापस अंदर जाने को तैयार नहीं हुआ।
इस पूरी घटना ने जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की संवेदनशीलता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
डॉक्टरों ने कुछ बोलने से किया इनकार
इस पूरे घटनाक्रम के बाद जब अस्पताल प्रबंधन और संबंधित डॉक्टरों से उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो उन्होंने कैमरे के सामने या इस विषय पर कुछ भी बोलने से साफ इनकार कर दिया।
अस्पताल प्रशासन की चुप्पी ने इस मामले को और भी गंभीर बना दिया है।