स्पेशलिटी केमिकल बनाने वाली भारत की प्रमुख कंपनियों में से एक, हिमाद्री स्पेशलिटी केमिकल्स ने देश की सबसे बड़ी बैटरी मैटेरियल बनाने वाली फैसिलिटी लगाने की योजना का एलान किया है। कंपनी को उम्मीद है कि इस कदम से अगले पांच सालों में इसके रेवेन्यू में शानदार बढ़ोतरी होगी।
यह प्रोजेक्ट भारत की इलेक्ट्रिक वाहन (EV) क्रांति को एक बड़ा बढ़ावा देगा। कंपनी का लक्ष्य इस दशक के अंत तक वैश्विक बैटरी मार्केट में अपनी मजबूत पहचान बनाना है।
100 GWh क्षमता की यूनिट
कंपनी कैथोड और एनोड मैटेरियल (जो इलेक्ट्रिक व्हीकल या EV की बैटरी में इस्तेमाल होने वाले दो मुख्य हिस्से हैं) के लिए 100 GWh की बैटरी मैटीरियल बनाने वाली यूनिट लगाने की योजना बना रही है।
कंपनी के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट से अगले पांच सालों में ₹30,000 करोड़ का अतिरिक्त रेवेन्यू मिलने की उम्मीद है। यह भारतीय बैटरी उद्योग के लिए एक ऐतिहासिक कदम होगा।
400-टन का पायलट प्लांट शुरू
हिमाद्री स्पेशलिटी केमिकल्स ने कहा कि इस सुविधा के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर प्लान को अभी अंतिम रूप दिया जा रहा है और अगले कुछ हफ्तों में इसका ऑफिशियल एलान होने की उम्मीद है।
कंपनी ने पहले ही 400-टन का पायलट प्लांट शुरू कर दिया है। इसके नतीजों से कमर्शियल-स्केल वाली सुविधा के सुचारू रूप से चलने और काम करने की उम्मीद है।
बैटरी मटीरियल की बढ़ती डिमांड
हिमाद्री को उम्मीद है कि इस दशक के आखिर तक एनोड और कैथोड मटीरियल की ग्लोबल डिमांड में जोरदार बढ़ोतरी होगी। बैटरी मैटेरियल का यह मार्केट अभी 2 TWh (टेरावाट-घंटे) का है और 2030 तक इसके दोगुने से अधिक बढ़कर 5 TWh होने का अनुमान है।
कंपनी के अनुसार, इसका मतलब है कि 10 मिलियन टन से अधिक कैथोड मटीरियल और 5 मिलियन टन एनोड मटीरियल की डिमांड होगी, जिससे हिमाद्री को दोनों सेगमेंट में अपनी मौजूदगी का फायदा मिलेगा।
किसके हाथ में है कंपनी की कमान?
हिमाद्री स्पेशलिटी केमिकल्स के फाउंडर, चेयरमैन और CEO अनुराग चौधरी हैं। उन्होंने कहा है, “बैटरी सेक्टर अगले दशक का सबसे बड़ा मौका है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर क्रांति के बाद अब EV क्रांति की बारी है, और यह इससे कहीं ज्यादा बड़ी होगी।”
उन्होंने आगे कहा कि सेल बनाने में इस्तेमाल होने वाले रॉ मटीरियल कंपोनेंट्स की भारी डिमांड आने वाली है। कंपनी इसी डिमांड को पूरा करने के लिए तैयार है।
LFP प्लांट की भी घोषणा
इससे पहले कंपनी ने लिथियम आयरन फॉस्फेट (LFP) कैथोड एक्टिव मटीरियल प्लांट लगाने की योजना की घोषणा की थी, जिसकी शुरुआती क्षमता 40,000 मीट्रिक टन होगी और बाद में इसे बढ़ाकर 200,000 मीट्रिक टन कर दिया जाएगा।
कंपनी ने कहा था कि LFP प्लांट का पूरे साल का कामकाज FY29 में शुरू होगा, जिससे हमारे रेवेन्यू और मुनाफे में काफी बढ़ोतरी होगी।
शेयर ने किया मालामाल
हिमाद्री की लिस्टिंग जुलाई 2002 में हुई थी। तब इसका शेयर मात्र 50 पैसे का था। आज यह 688 रुपये के आस-पास ट्रेड कर रहा है।
यानी इस शेयर ने करीब 24 साल में 1,35,040 फीसदी रिटर्न दिया है। यह शानदार प्रदर्शन कंपनी की मजबूत विकास योजनाओं और बाजार में उसकी स्थिति को दर्शाता है।