हाल ही में विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारतीय पासपोर्ट का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय यात्रा को सुगम बनाना है। मंत्रालय के अनुसार, किसी व्यक्ति की नागरिकता का निर्धारण नागरिकता कानूनों और संबंधित नियमों के तहत होता है, जबकि पासपोर्ट एक आधिकारिक यात्रा दस्तावेज है।
इस स्पष्टीकरण के बाद विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाना शुरू कर दिया कि अगर पासपोर्ट भी नागरिकता का प्रमाण नहीं है, तो आम नागरिक अपनी भारतीय नागरिकता कैसे साबित करेगा।
विपक्ष ने उठाए तीखे सवाल
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने सरकार पर निशाना साधते हुए पूछा कि यदि आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी और पासपोर्ट को भी नागरिकता का पर्याप्त प्रमाण नहीं माना जा रहा है, तो आखिर नागरिक किस दस्तावेज को अपनी राष्ट्रीयता का सबूत मानें।
उन्होंने सवाल किया कि पासपोर्ट जारी करने से पहले पुलिस सत्यापन क्यों किया जाता है और क्या भारत सरकार गैर-भारतीयों को भी पासपोर्ट जारी करती है।
आदित्य ठाकरे ने भी उठाया सवाल
इसी तरह आदित्य ठाकरे ने कहा कि यदि विदेश मंत्रालय की नजर में पासपोर्ट नागरिकता का दस्तावेज नहीं है तो पासपोर्ट जारी करने से पहले होने वाली जांच का उद्देश्य क्या है।
उन्होंने कहा कि अगर पासपोर्ट नागरिकता साबित नहीं करता, तो फिर उसे जारी करने से पहले इतनी सख्त जांच की जरूरत ही क्या है।
कपिल सिब्बल ने भी साधा निशाना
राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है तो फिर कौन-सा दस्तावेज नागरिकता साबित करेगा।
उन्होंने आशंका जताई कि ऐसी स्थिति में नागरिकों के अधिकारों पर सवाल खड़े हो सकते हैं। उन्होंने सरकार से स्पष्टीकरण मांगा कि आम आदमी को किस दस्तावेज पर भरोसा करना चाहिए।
जावेद अख्तर ने भी कसा तंज
प्रसिद्ध लेखक और गीतकार जावेद अख्तर ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि पासपोर्ट केवल यात्रा दस्तावेज है तो क्या सरकार बिना पूरी तरह संतुष्ट हुए कि व्यक्ति भारतीय नागरिक है, उसे पासपोर्ट जारी कर देती है।
उन्होंने कहा कि यह एक गंभीर विषय है और सरकार को इस पर स्पष्टीकरण देना चाहिए।
सरकार के सूत्रों का जवाब
विपक्ष के आरोपों के बीच सरकार के सूत्रों ने साफ किया है कि पासपोर्ट को नागरिकता का अंतिम प्रमाण न मानने की कानूनी स्थिति कोई नई नहीं है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह फैसला न तो कल लिया गया और न ही पिछले 12 वर्षों में।
सरकार का कहना है कि पासपोर्ट कभी भी भारतीय नागरिकता का अंतिम और निर्णायक प्रमाण नहीं रहा है।
पासपोर्ट एक्ट 1967 का हवाला
सरकार के सूत्रों ने यह भी कहा कि पासपोर्ट एक्ट 1967 में ऐसे प्रावधान मौजूद हैं, जिनके तहत कुछ विशेष परिस्थितियों में गैर-नागरिकों को भी यात्रा संबंधी दस्तावेज जारी किए जा सकते हैं।
यानी कानून में पहले से ही यह व्यवस्था है। सरकार ने कुछ नया नहीं किया है।
बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले का हवाला
इसके अलावा सरकार के सूत्रों ने 2013 में बॉम्बे के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि अदालत भी स्पष्ट कर चुकी है कि पासपोर्ट अपने आप में नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता।
यानी कानून और अदालतें भी इस बात पर सहमत हैं कि पासपोर्ट सिर्फ यात्रा का दस्तावेज है।
सियासत गर्म
इस पूरे मामले पर सियासत गर्म हो गई है। विपक्षी दल इसे सरकार की विफलता बता रहे हैं, जबकि सरकार कह रही है कि इसमें नई बात कुछ नहीं है।
आम नागरिकों के मन में भी कई सवाल हैं। अब देखना यह होगा कि सरकार इस विवाद को कैसे शांत करती है।