संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में गिनी जाती है। हर साल लाखों युवा इस परीक्षा में बैठते हैं और उनमें से कुछ ही अंतिम सूची में जगह बना पाते हैं। लेकिन UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 के नतीजे आने के बाद एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने सबको हैरान कर दिया।
दो आकांक्षा सिंह, एक रैंक का दावा
मेरिट लिस्ट में रैंक 301 (Rank 301) को लेकर दो अलग-अलग युवतियों ने दावा कर दिया कि यह रैंक उन्हीं की है। हैरानी की बात यह थी कि दोनों का नाम भी एक जैसा था – आकांक्षा सिंह (Akanksha Singh) । एक तरफ बिहार के आरा (Arrah, Bihar) की रहने वाली आकांक्षा सिंह सामने आईं, जिन्होंने मीडिया के सामने अपनी सफलता की कहानी बताई। वहीं दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश के गाजीपुर (Ghazipur, UP) की आकांक्षा सिंह ने सोशल मीडिया के जरिए दावा किया कि उनकी पहचान का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है।
गाजीपुर की आकांक्षा ने साझा किए दस्तावेज
गाजीपुर की आकांक्षा सिंह ने फेसबुक पर पोस्ट करते हुए कहा कि उनकी रैंक और पहचान का कोई और इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने अपनी पोस्ट में आईडी कार्ड (ID Card) और UPSC का ई-समन (e-Summon) भी साझा किया। उनके मुताबिक असली उम्मीदवार वही हैं और उनके नाम का गलत तरीके से उपयोग किया जा रहा है। दोनों ही युवतियों के पास अपने-अपने दस्तावेज थे और दोनों ही पूरी मजबूती से अपना दावा कर रही थीं।
UPSC ने साफ किया कि कौन है असली टॉपर
इस पूरे विवाद के बाद आखिरकार संघ लोक सेवा आयोग की तरफ से आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आया। आयोग ने अपने रिकॉर्ड के आधार पर स्पष्ट किया कि सिविल सेवा परीक्षा 2025 में रैंक 301 हासिल करने वाली असली उम्मीदवार उत्तर प्रदेश के गाजीपुर की आकांक्षा सिंह हैं।
क्या है असली उम्मीदवार की पहचान?
आयोग के अनुसार, गाजीपुर की आकांक्षा सिंह का:
- रोल नंबर (Roll Number): 0856794
- पिता का नाम: रणजीत सिंह
- माता का नाम: नीलम सिंह
- पता: ग्राम अभयपुर, जिला गाजीपुर, उत्तर प्रदेश
आयोग ने स्पष्ट किया कि उसके आधिकारिक रिकॉर्ड में यही जानकारी दर्ज है और उसी के आधार पर यह पुष्टि की गई है।
आरा की आकांक्षा के दावे पर क्या बोले लोग?
UPSC के स्पष्टीकरण के बाद अब यह तय हो गया है कि रैंक 301 गाजीपुर की आकांक्षा सिंह के नाम दर्ज है। हालांकि, आरा की आकांक्षा सिंह के इस तरह का दावा करने पर सोशल मीडिया पर लोगों ने मिली-जुली प्रतिक्रियाएं दी हैं। यह घटना इसलिए भी चर्चा में रही क्योंकि UPSC जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में इस तरह की स्थिति बहुत कम देखने को मिलती है। अब आयोग की तरफ से स्पष्ट जानकारी आने के बाद तस्वीर साफ हो गई है।