अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद अब उनके उत्तराधिकारी को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। इस बीच उनके बेटे मोजतबा अली खामेनेई (Mojtaba Ali Khamenei) चर्चा के केंद्र में हैं। उन्हें इजरायल की तरफ से धमकियां मिलने की खबर है। आइए जानते हैं कि वह कौन हैं और क्यों इतने खास हैं।
1969 में मशहद में जन्म, पांच भाई-बहन हैं
मोजतबा का जन्म 1969 में ईरान के पवित्र शहर मशहद (Mashhad) में हुआ था। वह अली खामेनेई के दूसरे सबसे बड़े बेटे हैं और उनके पांच भाई-बहन हैं। उनका बचपन ऐसे दौर में गुजरा जब उनके पिता शाह मोहम्मद रजा पहलवी के खिलाफ एक प्रमुख धार्मिक नेता के रूप में उभर रहे थे। 1979 की इस्लामी क्रांति (Islamic Revolution) ने परिवार की स्थिति पूरी तरह बदल दी और उन्हें नए ईरानी शासन के केंद्र में ला दिया।
तेहरान में पढ़ाई, पर अयातुल्लाह की उपाधि से अब भी दूर
क्रांति के बाद परिवार तेहरान (Tehran) चला गया। मोजतबा ने यहां अलवी हाई स्कूल में पढ़ाई की, जो शासन से जुड़े लोगों को तैयार करने के लिए जाना जाता है। इसके बाद उन्होंने कोम (Qom) शहर में रूढ़िवादी धर्मगुरुओं के साथ धार्मिक शिक्षा ग्रहण की। हालांकि, कई दशकों के धार्मिक अध्ययन के बाद भी वह अयातुल्लाह (Ayatollah) के पद तक नहीं पहुंचे हैं, जो ईरान के संविधान के अनुसार सुप्रीम लीडर के लिए अपेक्षित उच्च धार्मिक दर्जा है। यह मुद्दा लंबे समय से वरिष्ठ धर्मगुरुओं के बीच बहस का विषय रहा है।
ईरान-इराक युद्ध का अनुभव और IRGC से गहरे संबंध
ईरान-इराक युद्ध (Iran-Iraq War) के दौरान मोजतबा हबीब बटालियन में शामिल थे। यहां उनकी मुलाकात उन लोगों से हुई जो बाद में ईरान की सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों में शीर्ष पदों पर पहुंचे। विश्लेषकों का मानना है कि उनकी ताकत और प्रभाव मुख्य रूप से इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के साथ उनके करीबी संबंधों से आता है, जो ईरान की राजनीति, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा नीति में एक शक्तिशाली भूमिका निभाता है।
‘द्वारपाल’ और प्रभावशाली चेहरा, पर कोई आधिकारिक पद नहीं
हालांकि मोजतबा ने कभी कोई चुनाव नहीं लड़ा और न ही सरकार में कोई आधिकारिक पद संभाला, लेकिन अंदरूनी सूत्र उन्हें सुप्रीम लीडर के कार्यालय में एक बेहद प्रभावशाली व्यक्ति और ‘द्वारपाल’ (Gatekeeper) के रूप में देखते हैं। उनकी तुलना अक्सर अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी के बेटे अहमद खुमैनी से की जाती है, जो अपने पिता के अंतिम दिनों में बेहद ताकतवर बन गए थे।
अमेरिका ने लगाए प्रतिबंध, रहे विवादों में
2019 में अमेरिका ने मोजतबा पर प्रतिबंध (US Sanctions) लगाए थे। अमेरिका का आरोप था कि अली खामेनेई ने अपनी कुछ शक्तियां अपने बेटे को सौंप दी थीं, जिससे वह बिना किसी सार्वजनिक जवाबदेही के फैसले लेने लगे थे। सुधारवादी नेताओं ने उन पर चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने और सुरक्षा बलों की कार्रवाइयों का समर्थन करने का भी आरोप लगाया है, जिसे ईरानी सरकार हमेशा खारिज करती रही है।
अरबों डॉलर के निवेश नेटवर्क का दावा
ब्लूमबर्ग (Bloomberg) की एक रिपोर्ट के अनुसार, मोजतबा के पास बड़े पैमाने पर निवेश का एक विशाल नेटवर्क है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उन्होंने दुनिया के कई देशों में संपत्तियां बनाई और अरबों डॉलर की रकम (Billions of Dollars) पश्चिमी बाजारों में निवेश की, हालांकि उनकी कुल संपत्ति का आधिकारिक आंकड़ा सार्वजनिक नहीं है।
पिता ने नहीं माना था उत्तराधिकारी, लेकिन अब सबकी निगाहें उन्हीं पर
गौरतलब है कि अली खामेनेई ने अपने संभावित उत्तराधिकारियों के रूप में तीन वरिष्ठ धर्मगुरुओं के नाम तय किए थे, जिसमें उनके बेटे का नाम शामिल नहीं था। ऐसे में अगर वह सुप्रीम लीडर बनते हैं तो यह ईरान की उस मूल सोच को चुनौती देगा जिसमें वंशानुगत शासन (Hereditary Rule) को अस्वीकार किया गया था। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या वरिष्ठ धर्मगुरु और सुरक्षा तंत्र उनके समर्थन में एकजुट होते हैं।