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मनोरंजन

Mughal-e-Azam: 2000 ऊंट, 4000 घोड़े… 16 साल में बनी फिल्म, कंगाल हुए मेकर्स

SMW NEWS BUREAU
Last updated: 02/03/2026 1:10 PM
By SMW NEWS BUREAU 4 Min Read
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हिंदी सिनेमा (Hindi Cinema) के इतिहास में एक ऐसी फिल्म है, जिसे बनाने में पूरे 16 साल (16 Years) का वक्त लग गया। इस फिल्म की शुरुआत 1944 में हुई और यह 1960 में जाकर सिनेमाघरों में पहुंची। हम बात कर रहे हैं, सदाबहार फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’ (Mughal-e-Azam) की। के. आसिफ (K. Asif) के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने भारतीय सिनेमा को एक नई पहचान दी।

Contents
भव्यता की पराकाष्ठा: 2000 ऊंट, 4000 घोड़े और 8000 सैनिकदेशभर से जुटाई गईं कारीगरी की नायाब चीजेंबजट 1.5 करोड़, कमाई 10 करोड़ और कर्ज में डूबे मेकर्स5 किमी लंबी लाइन, 15 साल तक रहा कमाई का रिकॉर्ड ब्लैक एंड व्हाइट से कलर में बनी पहली फीचर फिल्म

भव्यता की पराकाष्ठा: 2000 ऊंट, 4000 घोड़े और 8000 सैनिक

फिल्म के निर्माताओं ने इसे ऐतिहासिक हकीकत के करीब दिखाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। फिल्म के युद्ध दृश्यों (War Scenes) को शूट करने के लिए 2000 ऊंट (2000 Camels), 4000 घोड़े (4000 Horses) और करीब 8000 सैनिकों (8000 Soldiers) को बुलाया गया था। बताया जाता है कि इनमें से कुछ जवान जयपुर रेजिमेंट (Jaipur Regiment) से उधार लिए गए थे। इस भव्यता की कीमत चुकानी पड़ी और निर्माता कर्ज में डूब गए।

देशभर से जुटाई गईं कारीगरी की नायाब चीजें

फिल्म की हर छोटी-बड़ी चीज पर खास ध्यान दिया गया।

  • पोशाकें: कलाकारों के कपड़े सिलने के लिए दिल्ली (Delhi) से दर्जी बुलाए गए।
  • कढ़ाई का काम: बारीक कढ़ाई के लिए सूरत (Surat) के विशेषज्ञ कारीगर बुलाए गए।
  • आभूषण और मुकुट: किरदारों के गहने हैदराबाद (Hyderabad) के सुनारों ने बनाए, जबकि मुकुट कोल्हापुर (Kolhapur) के कारीगरों ने तैयार किए।
  • हथियार और जूते: फिल्म में इस्तेमाल हथियार राजस्थान (Rajasthan) के लोहारों ने बनाए और जूते आगरा (Agra) से मंगवाए गए।

बजट 1.5 करोड़, कमाई 10 करोड़ और कर्ज में डूबे मेकर्स

उस समय 1.5 करोड़ रुपये का बजट (Budget) किसी फिल्म के लिए बेहद बड़ा आंकड़ा था। इतना पैसा लगने के बाद भी फिल्म बनते-बनते निर्माता कंगाल (Pauper) हो गए और उन पर कर्ज का पहाड़ टूट पड़ा। कहा जाता है कि हालत यह हो गई कि उनके पास सिगरेट खरीदने तक के पैसे नहीं बचे थे। हालांकि, रिलीज होने के बाद फिल्म ने बॉक्स ऑफिस (Box Office) पर धमाल मचा दिया और 10 करोड़ रुपये (10 Crores) से अधिक की कमाई की।

5 किमी लंबी लाइन, 15 साल तक रहा कमाई का रिकॉर्ड

‘मुगल-ए-आजम’ का क्रेज ऐसा था कि लोग टिकट पाने के लिए घंटों नहीं, बल्कि दिनों तक लाइन में लगे रहते थे।

  • टिकट के लिए मचा हड़कंप: एक्टर राजा मुराद (Raja Murad) ने बताया था कि उनके पिता हामिल अली मुराद, जो इस फिल्म का हिस्सा थे, के मुताबिक फिल्म सोमवार को रिलीज होनी थी और लोग शनिवार से ही एडवांस बुकिंग (Advance Booking) के लिए लाइन में लग गए थे। टिकट के लिए 5 किलोमीटर लंबी लाइन (5 km long queue) लगती थी और लोग सड़क पर ही सो जाते थे, जबकि परिवार वाले उनके लिए खाना लेकर आते थे।
  • रिकॉर्ड तोड़ कमाई: यह फिलम 15 सालों (15 Years) तक सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्म बनी रही। करीब 9.17 करोड़ टिकट (9.17 crore tickets) बिके थे।

 ब्लैक एंड व्हाइट से कलर में बनी पहली फीचर फिल्म

‘मुगल-ए-आजम’ पहले ब्लैक एंड व्हाइट (Black and White) में रिलीज हुई थी। बाद में इसे दोबारा रिलीज (Re-release) करने के लिए कलर (Color) में बदला गया और इस तरह यह विश्व सिनेमा के इतिहास की पहली कलर फीचर फिल्म (First Colorized Feature Film) बन गई। फिल्म को एक राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (National Film Award) और तीन फिल्मफेयर पुरस्कार (Filmfare Awards) से नवाजा गया।

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TAGGED: 1960 की फिल्में, Mughal-e-Azam Movie, के आसिफ, दिलीप कुमार, पृथ्वीराज कपूर, फिल्म निर्माण, बॉलीवुड क्लासिक, मधुबाला, मुगल-ए-आजम, हिंदी सिनेमा का इतिहास
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