प्रदेश भाजपा में नई जिम्मेदारियों के बाद कोयलांचल की राजनीति में बढ़ी हलचल, क्या उभर रहा है नया राजनीतिक समीकरण?
मध्य प्रदेश भाजपा में हाल ही में प्रदेश स्तर पर विभिन्न संगठनात्मक नियुक्तियों के बाद छिंदवाड़ा जिले को भी महत्वपूर्ण प्रतिनिधित्व मिला है। विशेष रूप से कोयलांचल क्षेत्र के कई कार्यकर्ताओं को प्रदेश संगठन एवं विभिन्न मोर्चों में जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इन्हीं नियुक्तियों में सबसे अधिक चर्चा डॉ. नितिन मोहन डेहरिया के नाम की हो रही है।
फरवरी में उन्हें प्रदेश अनुसूचित जाति मोर्चा का सोशल मीडिया प्रभारी बनाया गया था। इसके लगभग डेढ़ माह बाद भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें प्रदेश मीडिया पैनलिस्ट की जिम्मेदारी भी सौंपी। पत्रकारिता में पीएचडी करने वाले डॉ. डेहरिया को एक प्रभावी वक्ता, लेखक एवं वैचारिक कार्यकर्ता के रूप में जाना जाता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि से जुड़े डॉ. डेहरिया ने इंदौर में अध्ययन के दौरान विद्यार्थी परिषद में लगभग नौ वर्षों तक विभिन्न संगठनात्मक दायित्व निभाए। इस दौरान उन्होंने प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर के अनेक आयोजनों में सक्रिय भूमिका निभाई।
प्रदेश स्तर की जिम्मेदारियां मिलने के बाद उनकी क्षेत्रीय सक्रियता भी बढ़ी है। संगठनात्मक कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी, युवाओं से संवाद तथा सोशल मीडिया पर उनकी उपस्थिति को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चाएं तेज हुई हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि यही सक्रियता बनी रही तो आने वाले समय में परासिया विधानसभा की भाजपा राजनीति में नए समीकरण देखने को मिल सकते हैं।
क्या बन रहा है त्रिकोणीय राजनीतिक समीकरण?
राजनीतिक चर्चाओं में वर्तमान समय में भाजपा के भीतर तीन प्रमुख चेहरे चर्चा में हैं—विधानसभा प्रभारी ज्योति डेहरिया, पूर्व विधायक ताराचंद बावरिया तथा नए प्रदेश पदाधिकारी एवं मीडिया पैनलिस्ट डॉ. नितिन मोहन डेहरिया। हालांकि उम्मीदवारों को लेकर कोई आधिकारिक स्थिति नहीं है, लेकिन इन तीनों की सक्रियता को लेकर क्षेत्र में राजनीतिक चर्चाएं लगातार जारी हैं।
पहला केंद्र : ज्योति डेहरिया
ज्योति डेहरिया पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा की प्रत्याशी रही थीं और वर्तमान में विधानसभा प्रभारी हैं। हाल ही में उन्हें भाजपा प्रदेश कार्यसमिति का सदस्य भी बनाया गया है। इससे पहले वे भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा की जिला अध्यक्ष भी रह चुकी हैं।
महिला कार्यकर्ताओं के बीच उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है और वे लगातार क्षेत्र में सक्रिय बनी हुई हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में उन्हें अपेक्षाकृत कम मतों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा था। चुनाव के बाद उन्होंने कई बार सार्वजनिक रूप से यह कहा कि संगठन के भीतर कुछ लोगों की निष्क्रियता और विरोध का नुकसान उन्हें उठाना पड़ा।
वर्तमान में वे पुनः संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं के साथ लगातार संपर्क बनाए रखने में सक्रिय दिखाई दे रही हैं। उनका व्यवहार कार्यकर्ताओं के बीच सरल एवं सहज माना जाता है, जो उनकी राजनीतिक ताकत के रूप में देखा जाता है।
दूसरा केंद्र : पूर्व विधायक ताराचंद बावरिया
ताराचंद बावरिया परासिया विधानसभा का एक अनुभवी राजनीतिक चेहरा हैं। वे लगातार दस वर्षों तक क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। उन्हें पहली बार 1998 में भाजपा ने प्रत्याशी बनाया था, हालांकि उस चुनाव में वे पराजित हुए। इसके बाद 2003 में उन्होंने उल्लेखनीय जीत दर्ज की तथा 2008 में भी कम अंतर से विजयी रहे। वर्ष 2013 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा और 2018 में पुनः अवसर मिलने के बावजूद वे चुनाव नहीं जीत सके।
राजनीतिक अनुभव, संगठनात्मक समझ और प्रभावी वक्तृत्व उनकी प्रमुख विशेषताएं मानी जाती हैं। यही कारण है कि भाजपा संगठन समय-समय पर उन्हें प्रशिक्षण वर्गों एवं संगठनात्मक कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देता रहा है।
उनके पुत्र सौरभ बावरिया वर्तमान में भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश मंत्री एवं जबलपुर संभाग के प्रभारी हैं। ताराचंद बावरिया के साथ क्षेत्र के कई पुराने और अनुभवी कार्यकर्ता आज भी जुड़े हुए हैं, जिसे उनकी राजनीतिक मजबूती माना जाता है। उनके कार्यकाल में मंधान डैम का निर्माण उनकी प्रमुख उपलब्धियों में गिना जाता है।
तीसरा और उभरता चेहरा : डॉ. नितिन मोहन डेहरिया
लगभग 28 वर्षीय डॉ. नितिन मोहन डेहरिया को परासिया की राजनीति में एक शिक्षित एवं युवा चेहरे के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने इंदौर से स्नातक, स्नातकोत्तर एवं पत्रकारिता में पीएचडी की शिक्षा प्राप्त की। छात्र जीवन से ही वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एवं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े रहे और लगभग नौ वर्षों तक विभिन्न संगठनात्मक दायित्वों का निर्वहन किया।
वे एक लेखक एवं प्रभावी वक्ता के रूप में भी अपनी पहचान बना चुके हैं। वर्ष 2019 में भारत सरकार द्वारा आयोजित राष्ट्रीय युवा संसद कार्यक्रम में छिंदवाड़ा का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में सहभागिता की थी।
हालिया संगठनात्मक नियुक्तियों के बाद उनकी क्षेत्रीय सक्रियता में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है। विभिन्न संगठनात्मक कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी, मीडिया में पक्ष रखने की शैली तथा सोशल मीडिया पर उनके वीडियो व्यापक रूप से साझा किए जा रहे हैं। युवाओं के बीच उनकी सक्रियता और संवाद शैली भी चर्चा का विषय बनी हुई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि उनकी संगठनात्मक सक्रियता इसी प्रकार जारी रहती है, तो भाजपा की स्थानीय राजनीति में वे एक महत्वपूर्ण युवा चेहरा बन सकते हैं। हालांकि चुनाव अभी लगभग ढाई वर्ष दूर हैं और उम्मीदवारों का निर्णय पूरी तरह पार्टी नेतृत्व के हाथ में होगा।
निष्कर्ष
परासिया विधानसभा में भाजपा के भीतर फिलहाल कई सक्रिय चेहरे दिखाई दे रहे हैं। ज्योति डेहरिया, ताराचंद बावरिया और डॉ. नितिन मोहन डेहरिया—तीनों अलग-अलग अनुभव, संगठनात्मक पृष्ठभूमि और कार्यशैली के साथ सक्रिय हैं। ऐसे में आने वाले समय में संगठन की रणनीति, कार्यकर्ताओं का समर्थन और राजनीतिक परिस्थितियां यह तय करेंगी कि भविष्य में पार्टी किस चेहरे पर भरोसा जताती है। फिलहाल इतना अवश्य कहा जा सकता है कि परासिया विधानसभा की राजनीति पहले की अपेक्षा अधिक सक्रिय और रोचक होती दिखाई दे रही है।