ऑनलाइन फूड डिलीवरी की दिग्गज कंपनी ज़ोमैटो (Zomato) ने एक बार फिर अपने ग्राहकों की जेब पर बोझ बढ़ा दिया है। कंपनी ने अपनी प्लेटफॉर्म फीस (platform fee) में 19.2% की भारी वृद्धि करने का फैसला किया है। अब ग्राहकों को प्रत्येक ऑर्डर पर ₹14.90 (GST से पहले) की प्लेटफॉर्म फीस चुकानी होगी, जो पहले ₹12.50 थी। यह नया बदलाव 20 मार्च 2026 से प्रभावी हो गया है।
छह महीने में दूसरी बड़ी बढ़ोतरी
हैरानी की बात यह है कि ज़ोमैटो ने पिछले छह महीनों में यह दूसरी बार (second hike) फीस बढ़ाई है। इससे पहले सितंबर 2025 में प्लेटफॉर्म फीस में इजाफा किया गया था। साल 2023 की शुरुआत में यह फीस महज ₹2 से शुरू हुई थी, जो अब बढ़कर लगभग ₹15 के करीब पहुंच गई है। जानकारों का मानना है कि कंपनी अपनी यूनिट इकोनॉमिक्स (unit economics) और मुनाफे को बेहतर बनाने के लिए लगातार यह कदम उठा रही है।
स्विगी और रैपिडो का हाल
मार्केट में ज़ोमैटो की मुख्य प्रतिद्वंदी कंपनी स्विगी (Swiggy) भी वर्तमान में टैक्स सहित लगभग ₹14.99 की प्लेटफॉर्म फीस वसूल रही है। आमतौर पर देखा गया है कि जब भी एक कंपनी चार्ज बढ़ाती है, दूसरी भी उसी राह पर चलती है। हालांकि, इस बार बाजार में एक नया खिलाड़ी रैपिडो (Rapido) अपनी फूड डिलीवरी सर्विस ‘ओनली’ (Only) के साथ उतरा है। रैपिडो ने दावा किया है कि वह ग्राहकों से डिलीवरी फीस के अलावा कोई अतिरिक्त प्लेटफॉर्म फीस (no extra platform fee) नहीं लेगा, जिससे मौजूदा कंपनियों पर दबाव बढ़ सकता है।
क्यों बढ़ रही है फीस?
इस बढ़ोतरी के पीछे मुख्य कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें (rising crude oil prices) और परिचालन लागत (operational costs) में वृद्धि को माना जा रहा है। ईंधन महंगा होने से डिलीवरी ऑपरेशन्स पर सीधा असर पड़ता है। इसके अलावा, कंपनियां अब केवल ऑर्डर वॉल्यूम के बजाय प्रति ऑर्डर होने वाली कमाई (per-order revenue) पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं।
ग्राहकों पर असर
इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर उन ग्राहकों पर पड़ेगा जो छोटे मूल्य के ऑर्डर (जैसे ₹150 से ₹300) करते हैं। अब बिल में डिलीवरी चार्ज, रेस्टोरेंट चार्ज और GST के साथ-साथ ₹14.90 की प्लेटफॉर्म फीस जुड़ जाने से खाने की कुल कीमत काफी बढ़ जाएगी। यहां तक कि ‘ज़ोमैटो गोल्ड’ (Zomato Gold) मेंबर्स को भी, जिन्हें फ्री डिलीवरी की सुविधा मिलती है, यह प्लेटफॉर्म फीस अनिवार्य रूप से देनी होगी।
बढ़ती प्रतिस्पर्धा और ग्राहकों की नाराजगी के बीच, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ज़ोमैटो अपनी इस बढ़ी हुई फीस को बरकरार रख पाता है या रैपिडो जैसे नए विकल्पों की ओर ग्राहकों का झुकाव बढ़ेगा।