मध्य प्रदेश के विदिशा (Vidisha) शहर में स्थित सिद्धेश्वरी शक्तिपीठ (Siddheshwari Shaktipeeth) सनातन नववर्ष और चैत्र नवरात्रि 2026 (Chaitra Navratri 2026) के पावन अवसर पर एक बार फिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया है। हर वर्ष की तरह इस बार भी यहां भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है।
शेर के मुख से मंदिर में प्रवेश
विदिशा रेलवे स्टेशन के मुख्य द्वार के पास स्थित यह मंदिर अपनी विशेष बनावट के लिए जाना जाता है। मंदिर में प्रवेश करने के लिए श्रद्धालुओं को शेर के विशाल मुख (lion’s mouth) से होकर गुजरना पड़ता है, जो इसे अन्य मंदिरों से अलग बनाता है। ऐसी मान्यता है कि इस शेर मुख से प्रवेश करने वाले भक्तों के सभी कष्ट और बाधाएं दूर हो जाती हैं। मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही सबसे पहले मां सिद्धेश्वरी के दर्शन होते हैं। इसके साथ ही सिद्धेश्वर हनुमान और सिद्धनाथ भैरव भी विराजमान हैं।
वैष्णो देवी की तर्ज पर बनाई गुफा
मंदिर के अंदर वैष्णो देवी (Vaishno Devi) की तर्ज पर बनाई गई गुफा (cave) श्रद्धालुओं के आकर्षण का मुख्य केंद्र है। यहां मां महाकाली, महालक्ष्मी और मां सरस्वती के दर्शन होते हैं। यह गुफा श्रद्धालुओं को वैष्णो देवी धाम जैसा अनुभव कराती है, जिससे यहां आने वाले भक्त विशेष आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त करते हैं। जो लोग वैष्णो देवी धाम नहीं जा पाते, उनके लिए यह मंदिर एक विशेष विकल्प है।
दुर्लभ राम दरबार और अन्य मंदिर
मंदिर परिसर में नागेश्वर महादेव, मुक्तेश्वर महादेव और शनि देव सहित कई अन्य देवी-देवताओं के मंदिर भी स्थापित हैं। इसके अलावा यहां आठ मूर्तियों वाला दुर्लभ राम दरबार (rare Ram Darbar) भी मौजूद है, जिसमें भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न, गुरु वशिष्ठ, हनुमान जी और तुलसीदास जी की प्रतिमाएं एक साथ विराजमान हैं। मंदिर के तलघर में वर्षों से अखंड ज्योति (eternal flame) प्रज्वलित है और निरंतर रामायण पाठ (Ramayan recitation) किया जा रहा है।
इतिहास और आस्था का संगम
इतिहासकार गोविंद देवलिया के अनुसार, इस स्थान की शुरुआत एक छोटे से धार्मिक स्थल के रूप में हुई थी, जहां पहले एक पेड़ के नीचे मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित थी। समय के साथ श्रद्धालुओं और रेलवे कर्मचारियों के सहयोग से यहां भव्य मंदिर का निर्माण किया गया, जो आज एक बड़े आस्था केंद्र के रूप में विकसित हो चुका है।