मशहूर संगीतकार S.R. Dehariya ने हाल ही में regional music, खासकर Bhojpuri गानों की समृद्धि के बारे में अपने दिल की बात साझा की। विभिन्न genres में काम करने वाले S.R. Dehariya ने जोर देकर कहा कि regional music में गहरी सांस्कृतिक और भावनात्मक अनुभूति होती है जो भाषा और सीमाओं से परे जाती है।
S.R. Dehariya ने बताया कि Bhojpuri संगीत में निहित folk roots और devotional परंपराएं उस धरती की आत्मा और वहां के लोगों के जीवन के अनुभवों को दर्शाती हैं। उन्होंने इस बात की प्रशंसा की कि यह संगीत श्रोताओं को भावनात्मक और आध्यात्मिक स्तर पर कैसे जोड़ता है।
Dehariya के Notable Works और Musical Journey
कार्यक्रम के दौरान, S.R. Dehariya ने अपनी कुछ सबसे सराहनीय रचनाओं को highlight किया। Regional devotional music में उनका एक उल्लेखनीय काम Chhath Puja का गाना “कांच ही बांस के बहंगिया” है, जिसे legendary playback singer Anuradha Paudwal ने गाया था और lyrics Nitesh Tiwari ने लिखे थे। इस गाने को परंपरा और भक्ति के प्रामाणिक उत्सव के लिए व्यापक रूप से सराहा गया है।
Regional music के अलावा, S.R. Dehariya ने mainstream Hindi music के लिए भी compositions दिए हैं। उनका romantic number “तुमसे मोहब्बत”, जिसे Aakritti Mehra और Altamash Faridi ने गाया, को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली और यह एक composer के रूप में उनकी versatility को दर्शाता है।
Bhojpuri Music के बारे में क्या सोचते हैं S.R. Dehariya
Regional songs के प्रति अपनी रुचि के बारे में बात करते हुए, S.R. Dehariya ने कहा कि वह Bhojpuri music space में अपना काम जारी रखने में बहुत interested हैं। उन्होंने बताया कि वह पहले से ही Bhojpuri और folk music के साथ काम करने का आनंद लेते हैं और सुझाव दिया कि Bhojpuri industry के लिए कुछ खास काम pipeline में है। इस घोषणा ने fans और संगीत प्रेमियों को उत्साहित कर दिया है जो S.R. Dehariya के अगले project का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
S.R. Dehariya की टिप्पणियां भारत में एक व्यापक trend को भी दर्शाती हैं जहां regional songs और authentic folk music को नया appreciation मिल रहा है, खासकर युवाओं के बीच जो mainstream pop और film soundtracks से परे विविध संगीत अभिव्यक्तियों की तलाश कर रहे हैं।
Regional Music क्यों है जरूरी
Regional music, जिसमें Bhojpuri folk परंपराएं शामिल हैं, अक्सर स्थानीय संस्कृति, मौसमी गीतों, त्योहारों और सामुदायिक जीवन से प्रेरित होता है। Chaiti, Sawani, Kajari और Biraha जैसे रूपों की उत्तर प्रदेश और बिहार की संगीत परंपराओं में लंबे समय से जड़ें हैं, और ये क्षेत्रों की जीवंत सांस्कृतिक पहचान में योगदान करते हैं।
S.R. Dehariya जैसे कलाकार इन परंपराओं को contemporary platforms पर लाने में मदद करते हैं, सांस्कृतिक प्रामाणिकता को आधुनिक appeal के साथ मिलाते हैं, और नए श्रोताओं को regional music की भावनात्मक और कलात्मक समृद्धि को explore करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
निष्कर्ष
S.R. Dehariya की यात्रा यह दिखाती है कि regional music केवल entertainment नहीं, बल्कि संस्कृति और परंपरा को जीवित रखने का एक माध्यम है। उनके आने वाले रिजिनल प्रोजेक्ट का इंतजार fans को बेसब्री से है।