केंद्रीय कृषि मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) ने एक बार फिर अपने मानवीय संवेदनशीलता की मिसाल पेश की है। शुक्रवार को भोपाल (Bhopal) से ग्वालियर (Gwalior) जाते समय उन्होंने रास्ते में एक घायल युवक को सड़क किनारे अचेत अवस्था में तड़पते देखा। आसपास काफी भीड़ जमा थी, लेकिन कोई भी उसकी मदद के लिए आगे नहीं आ रहा था।
तुरंत रुकवाया काफिला, खुद की गाड़ी से पहुंचाया अस्पताल
शिवराज सिंह चौहान ने बिना एक पल गंवाए तुरंत अपने काफिले (Convoy) को रुकवाने का आदेश दिया और खुद गाड़ी से उतरकर घायल युवक के पास पहुंचे। सुरक्षा की परवाह किए बिना उन्होंने अपनी ही गाड़ी से उस युवक को तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचवाया, ताकि उसे समय पर इलाज मिल सके।
खुद डॉक्टरों से करवाई बात
इस घटना की जानकारी शिवराज सिंह ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर साझा की। उन्होंने लिखा कि युवक की गंभीर हालत देखते हुए उन्होंने तुरंत डॉक्टरों से फोन पर बात कर उसके बेहतर इलाज की व्यवस्था करवाई। उन्होंने अफसोस जताया कि वहां मौजूद भीड़ सिर्फ तमाशा देख रही थी और किसी ने भी उसे अस्पताल ले जाने की हिम्मत नहीं दिखाई।
‘गोल्डन ऑवर’ में मदद से बच सकती है आधी जान
शिवराज सिंह चौहान ने इस घटना के जरिए समाज को एक बड़ा संदेश देने की कोशिश की है। उन्होंने बताया कि देश में हर साल डेढ़ लाख से ज्यादा लोग (over 1.5 lakh people) सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवा देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर किसी घायल को दुर्घटना के बाद पहले एक घंटे यानी ‘गोल्डन ऑवर’ (Golden Hour) में अस्पताल पहुंचा दिया जाए, तो 50 फीसदी लोगों की जान बचाई जा सकती है।
‘सेवा ही सच्चा धर्म है’
अपने संदेश के अंत में शिवराज सिंह चौहान ने लोगों से भावुक अपील की। उन्होंने कहा, “हमारी एक छोटी सी मदद किसी मां की गोद सूनी होने से बचा सकती है और किसी बच्चे के सिर से पिता का साया हटने से रोक सकती है। सेवा ही सच्चा धर्म है (Service is the true religion) और परोपकार ही हमारा सबसे बड़ा कर्तव्य है।” उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि जब भी किसी जरूरतमंद को देखें, तो डरें नहीं और आगे बढ़कर मदद करें।