मध्य प्रदेश में इन दिनों बोर्ड परीक्षाएं (MP Board Exams 2026) चल रही हैं। शुक्रवार को बड़वानी (Barwani) जिले के एक परीक्षा केंद्र पर तब अफरातफरी मच गई, जब एक परीक्षार्थी लड़की के वेश (Boy disguised as a girl) में परीक्षा देने पहुंच गया। उसे देखकर पूरा स्टाफ हक्का-बक्का रह गया और उसे नकल गिरोह का सदस्य समझ लिया।
पीली शर्ट, लंबे बाल और गोल टोपी में पहुंचा परीक्षार्थी
जिले के पानसेमल (Panseymal) स्थित एक शासकीय कन्या विद्यालय परीक्षा केंद्र पर यह परीक्षार्थी पीली शर्ट, लंबे बाल और गोल टोपी (yellow shirt, long hair, round cap) पहनकर पहुंचा था। उसकी वेशभूषा से वह पूरी तरह से लड़की नजर आ रहा था। परीक्षार्थी के हुलिए से सेंटर पर तैनात स्टाफ को आशंका हुई तो उसकी पहचान के लिए दस्तावेजों की जांच की गई।
प्रवेश पत्र देख स्टाफ रह गया दंग
जब स्टाफ ने प्रवेश पत्र (exam admit card) देखा और उसके चेहरे की मिलान की, तो वे मुस्कुराए बिना नहीं रह सके। दस्तावेजों की जांच में परीक्षार्थी की पहचान सटीक निकली। यह लड़का ओसवाड़ा (Oswara) निवासी सुनताम भंडारे (Suntaam Bhandare) था, जो एक आदिवासी परिवार (tribal family) से ताल्लुक रखता है।
आदिवासी परंपरा का निर्वहन करते हुए पहुंचा परीक्षा केंद्र
दरअसल, गैर-आदिवासी समुदाय के लोग होली से लेकर रंग पंचमी (Rang Panchami) तक बहुरुपिया बनकर (in disguise) घर-घर फाग मांगने की परंपरा निभाते हैं। आदिवासी समुदाय के लिए भगोरिया और होली सबसे बड़ा त्योहार है। समुदाय के लोग पूरे 5 दिनों (5 days) तक अलग-अलग रूप धारण कर गांव-गांव जाकर फाग मांगते हैं और इस दौरान न तो वे घर जाते हैं और न ही अपनी वेशभूषा बदलते हैं।
परंपरा के बारे में बताया तो मिली परीक्षा देने की इजाजत
चूंकि रंग पंचमी से पहले ही परीक्षार्थी को एग्जाम देना था, इसलिए वह इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए लड़की के वेश में ही बोर्ड परीक्षा देने पहुंच गया। जब लड़के ने स्टाफ को आदिवासी संस्कृति और इस परंपरा के बारे में बताया, तब जाकर परीक्षा केंद्र प्रशासन ने राहत की सांस ली और उसे परीक्षा हॉल में बैठने की अनुमति दे दी। यह घटना आदिवासी परंपरा और आधुनिक शिक्षा प्रणाली के बीच एक अनोखा संगम बन गई।