इंडिया टुडे कॉन्क्लेव (India Today Conclave) में एटी कैपिटल के फाउंडर अरविंद टिकू (Arvind Tiku) ने भारत की वैश्विक ऊर्जा रणनीति (global energy strategy) पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव (geo-political tension) के कारण ऊर्जा संकट पैदा हुआ है, लेकिन भारत ने बेहतर कूटनीति दिखाते हुए अपने हितों को सुरक्षित रखा है।
अमेरिका की छूट के बाद एक दिन में खरीदे 30 मिलियन बैरल तेल
टिकू ने बताया कि फरवरी में भारत रूस से हर दिन 1 से 1.5 मिलियन बैरल तेल खरीद रहा था। लेकिन जैसे ही अमेरिका (US) ने रूसी तेल खरीद पर से प्रतिबंध हटाने की छूट दी, भारत ने एक ही दिन में 30 मिलियन बैरल तेल (30 million barrels of oil) की खरीदारी कर डाली। उन्होंने इसे भारत की सक्रिय और शांत रहने की रणनीति का नतीजा बताया।
क्या भारत रूसी तेल खरीदता रहेगा?
सवाल उठता है कि अमेरिका ने सिर्फ सीमित समय के लिए यह छूट दी है, तो क्या भारत हमेशा रूसी तेल आयात करता रहेगा? इस पर अरविंद टिकू ने स्पष्ट कहा कि भारत जैसे ऊर्जा आयात (energy import) पर निर्भर देश के लिए यह मायने रखता है कि उसे कितना सस्ता तेल और ऊर्जा मिल रही है, न कि यह कि वह कहां से खरीद रहा है।
उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि रूसी तेल को वैश्विक बाजार से हटाया जा सकता है। यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine War) के बाद जब यूरोप ने रूसी तेल खरीदना बंद किया, तो भारत को सस्ता ऊर्जा स्रोत मिला और उसने उसे अपनाया।”
भारत की रणनीति: प्राइस के हिसाब से संतुलन
टिकू ने समझाया कि भारत के पास दुनिया की बड़ी रिफाइनिंग क्षमता (refining capacity) है। इसलिए वह सस्ता कच्चा तेल (crude oil) लेकर रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद यूरोप को निर्यात (export) कर सकता है। उन्होंने कहा कि भारत ने कुशल कूटनीति (efficient diplomacy) के जरिए वैश्विक तेल बाजार में अपने हितों को सुरक्षित रखते हुए रूसी कच्चे तेल सहित विभिन्न स्रोतों से आयात को संतुलित किया है।
उनका साफ कहना था, “मुझे नहीं लगता कि भारत किसी अन्य देश के तेल को हटाकर रूस के तेल को खरीदेगा। वह हमेशा कीमत के हिसाब से ऊर्जा स्रोतों को संतुलित (balance energy sources based on price) करके चलेगा।”
भारत की अर्थव्यवस्था में अपार संभावनाएं
अरविंद टिकू ने भारत की आर्थिक संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था वर्तमान में लगभग 4.5 ट्रिलियन डॉलर (4.5 trillion dollars) की है, लेकिन प्रति व्यक्ति आय (per capita income) अभी भी 3,000 डॉलर से कम है। इसका मतलब है कि इसमें विस्तार की अपार संभावनाएं हैं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, “अगर हम प्रति व्यक्ति आय को दोगुना करके 6,000 डॉलर भी पहुंचा दें, तो हम 9 ट्रिलियन डॉलर (9 trillion dollars) की अर्थव्यवस्था बन जाएंगे।”
रिन्यूवेबल एनर्जी पर भी रखी राय
ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन (green energy transition) के बारे में पूछे जाने पर टिकू ने कहा कि भले ही दुनिया नवीकरणीय ऊर्जा की ओर बढ़ रही है, लेकिन भारत की ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए अगले 30-40 सालों तक तेल-गैस जैसे फॉसिल फ्यूल (fossil fuels) ऊर्जा मिश्रण का महत्वपूर्ण हिस्सा बने रहेंगे।