हैदराबाद | अभिनेता अल्लू अर्जुन (Allu Arjun) की बहुप्रतीक्षित साइंस-फिक्शन फिल्म ‘राका’ (Raaka) ने एक वैश्विक उपलब्धि हासिल की है। एटली (Atlee) के निर्देशन में बन रही और दीपिका पादुकोण (Deepika Padukone) स्टारर इस फिल्म ने ‘रियल-टाइम में सबसे ज्यादा लोगों के मोशन-कैप्चर’ (Most People Motion-Captured in Real-Time) का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड (Guinness World Record) बनाया है। सन पिक्चर्स (Sun Pictures) के कलानिधि मारन (Kalanithi Maran) द्वारा प्रोड्यूस की गई इस फिल्म के लिए यह रिकॉर्ड तब बना जब एक ही सेशन में 37 कलाकारों को एक साथ कैप्चर किया गया, जो भारतीय सिनेमा के लिए एक अहम तकनीकी उपलब्धि है।
कब और कैसे मिला रिकॉर्ड?
फरवरी 2026 में प्रोडक्शन के दौरान हासिल किए गए इस रिकॉर्ड को 15 सितंबर को आधिकारिक तौर पर सर्टिफाई किया गया। गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के सीनियर एडजुडिकेटर स्वप्निल डांगरीकर (Swapnil Dangarikar) ने फिल्म की मुख्य कास्ट और क्रू की मौजूदगी में हुए एक समारोह में लीड एक्टर अल्लू अर्जुन और निर्देशक एटली को सर्टिफिकेट सौंपा।
Allu Arjun ने क्या कहा?
इस सम्मान के बारे में बात करते हुए अल्लू अर्जुन ने कहा, “हमें इस शानदार उपलब्धि पर बहुत गर्व है, जो सिनेमा की सीमाओं को आगे बढ़ाती है और ग्लोबल स्तर पर एक नया बेंचमार्क सेट करती है। यह पूरी टीम के लिए गर्व का पल है। यह उपलब्धि मेरे निर्देशक, मिस्टर एटली की सोच और निर्देशन, और पूरी टीम के बेहतरीन काम के बिना मुमकिन नहीं होती।” उन्होंने सन पिक्चर्स को भी उनके लगातार सपोर्ट के लिए धन्यवाद दिया।
Atlee ने क्या कहा?
निर्देशक एटली ने कहा, “बड़े होते हुए, हमने हमेशा गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के बारे में बहुत हैरानी और उत्सुकता से सुना था, कभी सोचा भी नहीं था कि एक दिन हमें खुद ऐसा रिकॉर्ड बनाने का मौका मिलेगा। एक ही शूट में 37 मोशन-कैप्चर एसेट्स को एक साथ लाने के लिए यह पहचान मिलना सच में अविश्वसनीय है।” उन्होंने कहा कि यह याद दिलाने वाला पल है कि जब हम बड़े सपने देखते हैं और पूरे विश्वास के साथ मिलकर काम करते हैं, तो कभी-कभी नामुमकिन भी मुमकिन हो जाता है।
तकनीकी चुनौती क्या थी?
शूटिंग के दौरान, 37 कलाकारों—जिनमें चार साल के बच्चे से लेकर 70 साल के बुज़ुर्ग तक शामिल थे—को एक ही कैप्चर वॉल्यूम में रियल-टाइम में मोशन-कैप्चर किया गया। मुख्य तकनीकी चुनौती हर कलाकार के मूवमेंट डेटा को बिना सिग्नल लॉस या स्पेशल डिस्टॉर्शन के एक साथ ट्रैक करना था। इस रिकॉर्ड को बनाने के लिए, विजुअल इफेक्ट्स टीम ने प्रोडक्शन की तकनीकी जरूरतों के हिसाब से एक खास मोशन-कैप्चर पाइपलाइन तैयार की। इस सेटअप में 92 ऑप्टिकल मोशन-कैप्चर कैमरे लगाए गए, साथ ही रियल-टाइम विज़ुअलाइजेशन के लिए अनरियल इंजन (Unreal Engine) , सिंक्रोनाइज़्ड विटनेस फीड और लाइव डेटा स्ट्रीम कैलिब्रेशन को मैनेज करने के लिए फेशियल ट्रैकिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया।
आगर-मालवा | मध्य प्रदेश के आगर-मालवा जिले के नलखेड़ा स्थित प्रसिद्ध सिद्धपीठ मां बगलामुखी मंदिर (Baglamukhi Temple) के पास हुए दर्दनाक हादसे के बाद प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। मंदिर में अब रात 8 बजे के बाद हवन (Hawan) पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। शासन की ओर से जारी पत्र के अनुसार, अब मंदिर में हवन रात 8 बजे से पहले ही किए जा सकेंगे। यह फैसला उस हादसे के बाद लिया गया है, जिसमें तेज बारिश के दौरान एक कार बरसाती नाले में बह गई थी और उसमें सवार 8 श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी।
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क्या हुआ था हादसे में?कौन थे मृतक?सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवालCCTV में दिखा एक और व्यक्तिमुआवजे का ऐलान
क्या हुआ था हादसे में?
जानकारी के मुताबिक, ओडिशा के सात श्रद्धालु उज्जैन दर्शन के लिए आए थे। इसके बाद उन्होंने कार किराए पर ली और मां बगलामुखी मंदिर में दर्शन के लिए नलखेड़ा पहुंचे थे। शुक्रवार रात तेज बारिश के दौरान मंदिर के पास स्थित बरसाती नाले में पानी का बहाव अचानक बढ़ गया। कार पुलिया के पास तेज बहाव की चपेट में आ गई और करीब 100 मीटर दूर तक बह गई। बताया गया कि नलखेड़ा में उस दौरान पिछले 24 घंटे में करीब 3.7 इंच बारिश दर्ज की गई थी। हादसे का पता शनिवार सुबह चला, जब स्थानीय लोगों ने नाले में पलटी हुई कार देखी। SDRF की मदद से कार को नाले से बाहर निकाला गया और उसमें सवार सभी 8 लोगों के शव बरामद किए गए।
कौन थे मृतक?
मृतकों में 7 लोग ओडिशा के रहने वाले थे, जबकि कार चालक आगर-मालवा जिले के बड़ोद का निवासी था। मृतकों में तीन बच्चे भी शामिल थे। मृतकों की पहचान इस प्रकार हुई:
- अरुण पिता ब्रदीलाल गोयल (चालक, निवासी सुदवास, बड़ोद)
- राधारानी बेहरा (33)
- ज्ञानेंद्र कुमार बेहरा (41)
- रितारानी पत्नी ज्ञानेंद्र बेहरा (38)
- कृष्णा राजवीर पिता शिवप्रसाद (13)
- शिवप्रसाद बेहरा
- वी साई स्वस्तिक पिता ज्ञानेंद्र (10)
- शाहीरा स्वयं प्रभा पिता शिवप्रसाद (6)
पुलिस के मुताबिक, जब शवों को कार से बाहर निकाला गया, तो सभी के गले में माता के आशीर्वाद वाली लाल चुनरी लिपटी हुई थी। बताया गया कि श्रद्धालु रात में हवन-पूजन करने के बाद लौट रहे थे।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
हादसे के बाद नलखेड़ा में लोगों में आक्रोश भी देखने को मिला। बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर पहुंचे और अंबेडकर चौराहे पर चक्काजाम किया। स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए गए कि शुक्रवार रात करीब 9 बजे से 12 बजे तक तेज बारिश के दौरान जब मंदिर मार्ग का नाला उफान पर था, तब वहां सुरक्षा के इंतजाम क्यों नहीं किए गए। आरोप है कि नाले के दोनों ओर बेरिकेडिंग नहीं थी और सुरक्षा जवान भी मौजूद नहीं थे।
CCTV में दिखा एक और व्यक्ति
पुलिस के मुताबिक, मंदिर और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है। फुटेज में हादसे से पहले करीब 11 बजे एक व्यक्ति पैदल तेज बहाव वाले रास्ते को पार करता दिखाई दिया। बताया गया कि वह भी नाले के बहाव में बह गया और फिलहाल उसका कोई पता नहीं चल पाया है।
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क्या है मोशन कैप्चर (MoCap) तकनीक?
यह एक काफी अडवांस कैमरा सेटअप है। इसमें दो से लेकर 100 कैमरे हर एंगल से कलाकार की तस्वीर खींचते हैं। उनके जरिए इंसान के एक्सप्रेशन और मूवमेंट को सेंसर की मदद से रिकॉर्ड किया जाता है। फिर उस मूवमेंट को कंप्यूटर के जरिए फिल्म के 3D डिजिटल कैरेक्टर में फिट कर दिया जाता है। इससे वह कैरेक्टर बिल्कुल असली इंसान जैसे एक्सप्रेशन देने लगता है। इस तकनीक का इस्तेमाल ‘अवतार’ और ‘लॉर्ड्स ऑफ द रिंग्स’ जैसी हॉलीवुड की वर्ल्ड क्लास फिल्मों में किया जा चुका है।