वाशिंगटन | ईरान के साथ चल रहे युद्ध में अमेरिका को अपने MQ-9 रीपर ड्रोन (Reaper Drones) का बड़ा नुकसान हुआ है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, अब तक कम से कम 45 रीपर ड्रोन खो चुके हैं, जो युद्ध शुरू होने से पहले अमेरिकी बेड़े का लगभग 25% है। इन ड्रोनों का इस्तेमाल निगरानी और हमलों के लिए किया जाता है, और इस नुकसान की कीमत 1.3 अरब डॉलर से अधिक हो सकती है। साथ ही, युद्ध में बड़ी संख्या में मिसाइलों के इस्तेमाल ने अमेरिकी हथियारों के भंडार पर भी गंभीर संकट पैदा कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
युद्ध शुरू होने से पहले अमेरिका के पास कुल लगभग 185 रीपर ड्रोन थे (165 एयर फोर्स और 20 मरीन कॉर्प्स के पास)। अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास इन ड्रोनों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया, लेकिन ये ड्रोन कम ऊंचाई और धीमी गति से उड़ते हैं, जिससे ईरानी सेना और उसके सहयोगी गुटों के लिए इन्हें निशाना बनाना आसान हो गया। हालांकि, सभी ड्रोन दुश्मन के हमले में नहीं गिरे; कुछ तकनीकी खराबी और संपर्क टूटने के कारण भी क्रैश हो गए।
मिसाइलों का भंडार भी खाली हो रहा है
- टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें: युद्ध के पहले महीने में ही 850 से अधिक इस्तेमाल की गईं।
- पैट्रियट और THAAD मिसाइलें: 1,000 से अधिक मिसाइलें दागी जा चुकी हैं। THAAD मिसाइलों का इस्तेमाल दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के लिए होता है।
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अमेरिकी सेना के सामने क्या चुनौतियाँ हैं?
अमेरिका वर्तमान में सालाना केवल 96 THAAD इंटरसेप्टर बना सकता है, जबकि अगले साल 857 और पांच सालों में लगभग 2,600 इंटरसेप्टर की जरूरत बताई गई है। अमेरिकी रक्षा विभाग ने युद्ध के खर्च और हथियारों की भरपाई के लिए कांग्रेस से 67 अरब डॉलर के अतिरिक्त बजट की मांग की है। वहीं, यूक्रेन को दिए गए हथियारों के कारण भी अमेरिकी सैन्य भंडार पर पहले से ही दबाव है। अब ड्रोन और मिसाइलों को फिर से तैयार करने में समय लगेगा, जिससे अमेरिका के लिए युद्ध जारी रखना और नए हथियारों का भंडार बनाना, दोनों एक बड़ी चुनौती बन गए हैं।