भोपाल | ‘पेड़ लगाओ, पर्यावरण बचाओ’ का नारा तो आपने खूब सुना होगा, लेकिन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पर्यावरण संरक्षण का एक ऐसा अजीबोगरीब मॉडल सामने आया है, जिसने सभी को चौंका दिया है। यहां नए पौधे लगाने के लिए बरसों पुराने, हरे-भरे पेड़ों को ही काट दिया गया। ‘आजतक’ के इस खुलासे के बाद हड़कंप मच गया है और अब इन पेड़ों की जगह सिर्फ ठूंठ ही बचे हैं।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला भोपाल के कलियासोत इलाके का है। भोपाल नगर निगम ने यहां करीब 10 हजार पौधे लगाने का टेंडर एक ठेकेदार कंपनी को दिया था। इस जगह पर पहले से कई पेड़ मौजूद थे। ठेकेदार ने अपने कर्मचारियों को यहां मौजूद कांटेदार पेड़ों को काटने के लिए कहा, लेकिन स्थानीय निवासियों का आरोप है कि कांटेदार पेड़ों की आड़ में कई हरे-भरे, बरसों पुराने पेड़ों को भी काट दिया गया। ‘आजतक’ की टीम जब मौके पर पहुंची, तो वहाँ सिर्फ पेड़ों के ठूंठ बचे मिले। स्थानीय लोगों के अनुसार, इनमें नीम, गूलर और शीशम जैसे कीमती पेड़ भी शामिल थे, जिन्हें काट दिया गया।
निगम ने क्या कार्रवाई की?
मामला सामने आने के बाद भोपाल नगर निगम के अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने मामले की जांच के आदेश दिए। जांच में ठेकेदार की लापरवाही सामने आने पर उस पर 3.5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। साथ ही, यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या निगम के किसी अधिकारी की इस मामले में कोई लिप्तता या लापरवाही है।
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क्या है बड़ा सवाल?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर पहले से हरियाली मौजूद थी, तो उसे उजाड़ने की आखिर क्या ज़रूरत थी? यह विडंबना है कि हरियाली बढ़ाने के अभियान के नाम पर पहले से मौजूद हरियाली को ही खत्म कर दिया गया। एक पौधे को बड़ा पेड़ बनने में दशकों लग जाते हैं, लेकिन उसे काटने में कुछ ही मिनट लगते हैं। यह घटना सवाल खड़ी करती है कि क्या पर्यावरण संरक्षण का मतलब सिर्फ नए पौधे लगाना है या पहले से खड़े पेड़ों को बचाना भी उतना ही जरूरी है?