नई दिल्ली | विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार (31 जुलाई) को अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत की। इस दौरान उन्होंने मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव पर भारत की गहरी चिंता जताई और साफ शब्दों में कहा कि किसी भी सूरत में कमर्शियल जहाजों और भारतीय नाविकों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। जयशंकर ने किसी भी पक्ष द्वारा इस तरह के हमलों की कड़ी निंदा करते हुए संघर्ष को कूटनीति और बातचीत के जरिए सुलझाने की अपील दोहराई।
फोन पर क्या बात हुई?
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए जयशंकर ने बताया कि उन्होंने ईरानी विदेश मंत्री से क्षेत्रीय तनाव पर भारत की गहरी चिंता व्यक्त की और कमर्शियल शिपिंग तथा नाविकों की सुरक्षा पर जोर दिया। उन्होंने लिखा, “किसी भी स्थिति में कमर्शियल शिपिंग और नाविकों पर हमलों से बचा जाना चाहिए। भारत किसी भी पक्ष द्वारा किए गए ऐसे किसी भी हमले की निंदा करता है।”
विदेश मंत्री ने आगे बताया कि अब्बास अराघची ने उन्हें ईरान के नज़रिए से मौजूदा स्थिति और क्षेत्रीय तनाव के बीच चल रही बातचीत के बारे में जानकारी दी। जयशंकर ने कहा कि भारत हमेशा बातचीत और कूटनीति का समर्थन करता है और सभी पक्षों से संयम बरतने तथा संघर्षों के शांतिपूर्ण समाधान की अपील करता रहा है।
क्या है पृष्ठभूमि?
यह बातचीत ऐसे समय में हुई है, जब मध्य पूर्व में तनाव अपने चरम पर है। इससे एक दिन पहले ही, जयशंकर ने यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा के सामने काला सागर (ब्लैक सी) में कमर्शियल शिपिंग और भारतीय नाविकों पर हो रहे हमलों को लेकर चिंता जताई थी। भारत इन हमलों से अपने नागरिकों और व्यापारिक हितों को होने वाले खतरे को गंभीरता से ले रहा है। क्षेत्र में भारत के बड़ी संख्या में नाविक कार्यरत हैं और व्यापारिक जहाज आवाजाही करते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा भारत के लिए प्राथमिकता है। भारत अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुका है कि वह इस संघर्ष का शांतिपूर्ण और कूटनीतिक समाधान चाहता है और किसी भी पक्ष की हिंसा का विरोध करता है।