भोपाल | मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कई दिनों से चल रहा किसानों का बड़ा आंदोलन आखिरकार समाप्त हो गया है। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के नेतृत्व में आंदोलन कर रहे किसानों ने सरकार के साथ हुई बातचीत के बाद धरना समाप्त करने का ऐलान किया। सरकार ने मूंग की MSP पर खरीद बढ़ाने और खाद वितरण की ई-टोकन व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने सहित कई मांगों पर सहमति जताई, जिसके बाद किसान अपने-अपने घरों को लौट गए।
क्यों हुआ था आंदोलन?
पूरे आंदोलन की जड़ ग्रीष्मकालीन मूंग की MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर खरीद को लेकर थी। किसानों का कहना था कि इस साल रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है, लेकिन सरकार सीमित मात्रा में ही खरीद कर रही थी, जिससे बड़ी संख्या में किसानों को अपनी फसल बाजार में कम दाम पर बेचनी पड़ रही थी। दूसरी बड़ी शिकायत खाद वितरण के लिए लागू ई-टोकन व्यवस्था को लेकर थी, जिससे किसानों को समय पर खाद नहीं मिल पा रही थी और उनकी खेती प्रभावित हो रही थी।
कैसे बनी बात?
बातचीत की प्रक्रिया कई दिनों तक चली। 27 जुलाई को नर्मदापुरम से करीब दो हजार किसानों ने भोपाल के लिए पैदल मार्च शुरू किया। 28 जुलाई को वे भोपाल की सीमा तक पहुंचे और वीर सावरकर सेतु के पास डेरा डाल दिया। 29 जुलाई को किसानों ने मुख्यमंत्री आवास की तरफ मार्च करने की कोशिश की, जहां पुलिस और किसानों के बीच धक्का-मुक्की हुई। इसके बाद सरकार ने किसान प्रतिनिधियों के साथ लंबी बैठक की और कुछ प्रस्ताव रखे। हालांकि, किसानों ने उस समय कहा कि उनकी सभी मांगें पूरी नहीं हुई हैं और आंदोलन जारी रहेगा। अंततः 30 जुलाई को लगातार बातचीत के बाद सरकार और किसान संगठनों के बीच सहमति बनी।
सरकार ने क्या राहतें दीं?
- मूंग खरीद में वृद्धि: राज्य सरकार ने कहा कि अब हर पात्र किसान से उसकी 60% मूंग उपज की खरीद की जाएगी, जबकि पहले 25% का प्रावधान था। नर्मदापुरम, सीहोर और हरदा जैसे जिलों में यह लगभग 3 क्विंटल प्रति एकड़ बैठता है।
- खरीद की तिथियों में विस्तार: स्लॉट बुकिंग की अंतिम तारीख 30 जुलाई से बढ़ाकर 10 अगस्त और खरीद (उपार्जन) की अंतिम तारीख 10 अगस्त से बढ़ाकर 20 अगस्त कर दी गई।
- ई-टोकन व्यवस्था पर रोक: किसानों की सबसे बड़ी मांग पर सरकार ने खाद वितरण की ई-टोकन व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया। इस व्यवस्था की समीक्षा के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति गठित की जाएगी।
- अन्य मांगों पर आश्वासन: सरकार ने किसानों की अन्य मांगों पर भी सकारात्मक कार्रवाई का भरोसा दिया।
आंदोलन का अंत
सरकार के इन आश्वासनों के बाद संयुक्त किसान मोर्चा ने आंदोलन समाप्त करने का ऐलान कर दिया। इसके साथ ही कई दिनों से भोपाल की सड़कों पर डटे किसान अपना धरना खत्म कर वापस लौटने लगे हैं। प्रशासन ने किसानों को वापस जाने के लिए बसों की व्यवस्था की। किसान नेताओं ने कहा कि अगर सरकार अपने वादों पर खरी नहीं उतरी तो वे फिर से आंदोलन शुरू कर देंगे, लेकिन फिलहाल उन्होंने इस जनआंदोलन को विराम दे दिया है।