मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। सरकार की ओर से बनाई गई समिति ने अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री मोहन यादव को सौंप दी है।
रिपोर्ट में सबसे अहम सिफारिश यह की गई है कि अनुसूचित जनजातियों (ST) को UCC के दायरे से बाहर रखा जाए। अब रिपोर्ट कानून विभाग को भेज दी गई है।
क्या है रिपोर्ट में?
समिति की रिपोर्ट तीन हिस्सों में तैयार की गई है। पहले हिस्से में देश-विदेश और मध्य प्रदेश के मौजूदा कानूनों का अध्ययन करने के बाद सिफारिशें दी गई हैं।
दूसरे हिस्से में UCC का ड्राफ्ट बिल शामिल है, जबकि तीसरे भाग में जनता से मिले सुझावों का पूरा ब्योरा दिया गया है।
404 धाराओं वाला ड्राफ्ट
सरकार के मुताबिक इस ड्राफ्ट बिल में चार भाग, 404 धाराएं और सात अनुसूचियां शामिल हैं। यह एक व्यापक ड्राफ्ट है, जिसमें पारिवारिक मामलों से जुड़े हर पहलू को शामिल किया गया है।
रिपोर्ट तैयार करने के दौरान जिला, राज्य और वेबसाइट के जरिए लोगों से राय मांगी गई थी। इस प्रक्रिया में 9.58 लाख से ज्यादा सुझाव मिले।
किन मामलों पर किया गया अध्ययन?
समिति को शादी, तलाक, गुजारा भत्ता, संपत्ति में उत्तराधिकार, गोद लेने और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे पारिवारिक मामलों से जुड़े मौजूदा कानूनों का अध्ययन करने की जिम्मेदारी दी गई थी।
इसी आधार पर मध्य प्रदेश की सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ड्राफ्ट तैयार किया गया।
आदिवासियों को छूट की सिफारिश
रिपोर्ट में सबसे महत्वपूर्ण सिफारिश अनुसूचित जनजातियों को UCC के दायरे से बाहर रखने की है। यह आदिवासी समुदायों की पारंपरिक प्रथाओं और रीति-रिवाजों को ध्यान में रखते हुए की गई है।
लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के साथ प्रदेश की पारंपरिक रीति-रिवाजों, सामाजिक प्रथाओं और संवैधानिक प्रावधानों का भी ध्यान रखा गया है।
मानसून सत्र में आ सकता है विधेयक
अब रिपोर्ट कानून विभाग को भेज दी गई है। अगले चरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मानसून सत्र में इससे जुड़ा विधेयक विधानसभा में पेश किया जा सकता है।
मध्य प्रदेश विधानसभा का पांच दिवसीय मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है। इसी सत्र में UCC विधेयक पेश किए जाने की उम्मीद है।
सीएम ने जताया आभार
तय समय के भीतर रिपोर्ट सौंपने के लिए CM मोहन यादव ने समिति के सभी सदस्यों का आभार जताया है।
वरिष्ठ अधिकारियों की एक समिति अब पहले इस रिपोर्ट की समीक्षा करेगी, इसके बाद कैबिनेट की मंजूरी ली जाएगी।