मध्य प्रदेश में रेलवे स्टेशनों पर रहने वाले लोगों की अब सिर्फ गिनती नहीं होगी, बल्कि उनकी पूरी डिजिटल प्रोफाइल तैयार की जाएगी। इसके लिए GRP ने ‘ऑपरेशन हमदर्द’ शुरू किया है।
पुलिस का कहना है कि इस अभियान का मकसद रेलवे स्टेशनों की सुरक्षा बढ़ाने के साथ-साथ बेसहारा और बेघर लोगों की पहचान कर उन्हें पुनर्वास से जोड़ना भी है।
पूरे जुलाई माह चलेगा अभियान
एडीजी (रेलवे) राजाबाबू सिंह ने बताया कि यह अभियान 1 जुलाई से 31 जुलाई तक पूरे प्रदेश में चलेगा।
अभियान के पहले ही दिन प्रदेश के अलग-अलग रेलवे स्टेशनों पर रहने वाले करीब 150 बेसहारा लोगों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया गया है।
20 बिंदुओं पर बनेगी प्रोफाइल
इस अभियान के तहत रेलवे स्टेशनों पर रहने वाले हर व्यक्ति की 20 बिंदुओं पर विस्तृत प्रोफाइल तैयार की जा रही है।
इसमें नाम, उम्र, स्थायी और वर्तमान पता, आधार नंबर, मोबाइल नंबर, स्टेशन पर कब से रह रहा है, परिजनों का संपर्क, आजीविका का साधन, साथ रहने वाले लोगों की जानकारी, आपराधिक रिकॉर्ड, नशा करता है या नहीं, करता है तो किस प्रकार का और नशा कहां से प्राप्त करता है, जैसी जानकारियां दर्ज की जा रही हैं।
गिरोहों पर भी होगी कार्रवाई
अभियान के दौरान GRP रेलवे स्टेशनों पर रहने वाले लोगों से पूछताछ भी करेगी। अगर जांच में किसी गिरोह या सिंडिकेट की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह एक बड़ा कदम है, क्योंकि कई बार स्टेशनों पर रहने वाले लोग आपराधिक गतिविधियों में शामिल होते हैं।
डिजिटल रिकॉर्ड रखे जाएंगे सुरक्षित
तैयार किए जा रहे सभी डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएंगे, ताकि भविष्य में जरूरत पड़ने पर उनका इस्तेमाल किया जा सके।
यह डेटाबेस पुलिस को किसी भी संदिग्ध व्यक्ति की पहचान करने में मदद करेगा।
साल में दो बार चलेगा अभियान
एडीजी (रेलवे) राजाबाबू सिंह के मुताबिक, यह अभियान 6-6 महीने के अंतराल में साल में दो बार चलाया जाएगा।
क्योंकि रेलवे स्टेशनों पर फ्लोटिंग पॉपुलेशन रहती है, इसलिए इसके सही आंकलन के लिए साल में दो बार यह अभियान चलाया जाएगा।
देश का पहला राज्य बना MP
मध्य प्रदेश इस तरह का अभियान शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।
यह एक पहल है जो दूसरे राज्यों के लिए भी मिसाल बन सकती है। उम्मीद है कि अन्य राज्य भी इस मॉडल को अपनाएंगे।