मध्य प्रदेश के नीमच सोलर पार्क के नाम एक बड़ा वैश्विक रिकॉर्ड दर्ज हुआ है। इसका बिजली टैरिफ मात्र 2.14 रुपये प्रति यूनिट है, जो पूरी दुनिया में सबसे कम माना जा रहा है।
यह उपलब्धि भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है। इससे साफ ऊर्जा सस्ती होगी।
‘वैनिला सोलर’ क्या है?
एनर्जी सेक्टर में ‘वैनिला सोलर’ शब्द का इस्तेमाल आमतौर पर उन सोलर पावर प्रोजेक्ट्स के लिए किया जाता है जो सिर्फ सोलर पैनल से बिजली बनाते हैं और जिनमें बैटरी स्टोरेज जैसी अतिरिक्त सुविधाएं नहीं होती हैं।
यानी यह एक साधारण सोलर प्लांट है, जिसमें कोई जटिल तकनीक नहीं है। फिर भी इसने दुनिया का सबसे कम टैरिफ हासिल किया है।
950 मेगावाट क्षमता की परियोजनाओं का उद्घाटन
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने मध्य प्रदेश में कुल 950 मेगावाट क्षमता वाली दो सोलर पावर परियोजनाओं का उद्घाटन किया। इनमें नीमच में 500 मेगावाट और शाजापुर में 450 मेगावाट का सोलर पार्क शामिल है।
इस मौके पर राज्य के मुख्यमंत्री मोहन यादव भी मौजूद थे। यह समारोह बेहद भव्य था।
2.14 रुपये प्रति यूनिट टैरिफ
नीमच सोलर पार्क में बनने वाली बिजली का टैरिफ 2.14 रुपये, 2.149 रुपये और 2.15 रुपये प्रति यूनिट है। यह पार्क तीन यूनिट में फैला है और कुल 2500 एकड़ जमीन पर बना है।
यह प्रोजेक्ट भारतीय रेलवे और राज्य ग्रिड को साफ-सुथरी बिजली सप्लाई करेगा।
केंद्रीय मंत्री ने क्या कहा?
उद्घाटन समारोह में बोलते हुए नए और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री जोशी ने कहा कि नीमच सोलर पार्क में बहुत अच्छा काम हुआ है।
उन्होंने कहा, “जहां तक मुझे पता है, 2.14 रुपये प्रति यूनिट का टैरिफ शायद वैनिला सोलर प्रोजेक्ट से बनने वाली बिजली के लिए सबसे कम है – न सिर्फ देश में, बल्कि पूरी दुनिया में।”
मध्य प्रदेश ‘ग्रीन एनर्जी पावरहाउस’ बन रहा
जोशी ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में राज्य सरकार की कोशिशों की तारीफ की और कहा कि मध्य प्रदेश एक ‘ग्रीन एनर्जी पावरहाउस’ बन रहा है।
राज्य की कुल 38 गीगावाट बिजली उत्पादन क्षमता में से लगभग 12 गीगावाट क्षमता नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर आधारित है।
50% रिन्यूएबल एनर्जी का लक्ष्य
जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उम्मीदों के अनुसार, राज्य की कुल बिजली उत्पादन क्षमता में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी कम से कम 50 प्रतिशत होनी चाहिए।
यानी राज्य को अपनी आधी बिजली साफ ऊर्जा से बनानी होगी। यह एक बड़ा लक्ष्य है।
पवन ऊर्जा पर भी जोर
जोशी ने कहा कि राज्य में लगभग 55 गीगावाट पवन ऊर्जा पैदा करने की क्षमता है। अभी राज्य में 3.7 गीगावाट पवन ऊर्जा क्षमता लगी हुई है और 1.3 गीगावाट क्षमता वाले प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है।
उन्होंने कहा कि अगर अगले दो सालों में पवन ऊर्जा उत्पादन को कम से कम 10 गीगावाट तक बढ़ाया जाता है, तो बिजली की लागत काफी कम हो जाएगी।
सरकारी इमारतों में सोलर प्रोजेक्ट अनिवार्य
केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि राज्य की हर सरकारी इमारत में सोलर पावर प्रोजेक्ट होना चाहिए।
इससे न सिर्फ बिजली की बचत होगी, बल्कि साफ ऊर्जा को भी बढ़ावा मिलेगा।
1554 करोड़ के निवेश की घोषणा
इस कार्यक्रम में जोशी और मुख्यमंत्री यादव ने लगभग 1554 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश वाले 38 औद्योगिक प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और उद्घाटन भी किया।
अधिकारियों ने बताया कि इन प्रोजेक्ट्स से 3200 से ज्यादा लोगों को सीधे रोजगार मिलेगा।