मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के हथनारा गांव में मोहर्रम के जुलूस के दौरान एक बड़ा हादसा हो गया। ताजिया हाई टेंशन बिजली की लाइन से टकरा गया, जिससे करंट की चपेट में आकर दो लोगों की मौत हो गई और 12 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंचे और राहत कार्य शुरू किए। घायलों को तुरंत रतलाम मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाया गया।
लापरवाही ने ली मासूमों की जान
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, ताजिया जैसे ही मोड़ पर पहुंचा, उसका ऊपरी हिस्सा सीधे 11 KV की हाई वोल्टेज लाइन के संपर्क में आ गया। करंट इतना जोरदार था कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
आनन-फानन में सभी घायलों को रतलाम मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने दो लोगों की मौत की पुष्टि की है। वहीं, ग्रामीणों का दावा है कि तीन लोगों की जान जा चुकी है, हालांकि प्रशासन अभी दो मौतों पर ही अड़ा है।
पांच की हालत नाजुक
फिलहाल पांच घायलों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। अस्पताल में भर्ती 12 से अधिक घायलों में से कुछ गंभीर रूप से झुलस गए हैं।
डॉक्टरों की टीम उनके इलाज में जुटी है। परिवार वालों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि कई घायलों की हालत अब भी खतरे से बाहर नहीं है।
सुरक्षा नियमों की अनदेखी
यह हादसा सीधे तौर पर बिजली विभाग और स्थानीय प्रशासन के बीच तालमेल की कमी को उजागर करता है। नियम के मुताबिक, किसी भी धार्मिक जुलूस या ताजिया निकालने से पहले पुलिस, प्रशासन और बिजली कंपनी मिलकर रूट का मुआयना करते हैं।
ताजियों की ऊंचाई को देखते हुए या तो तारों को ऊंचा किया जाता है या उस दौरान बिजली की सप्लाई बंद रखी जाती है। लेकिन हथनारा में इन नियमों को ताक पर रख दिया गया।
जांच के घेरे में जिम्मेदार
हादसे के बाद से ही हथनारा गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है और हर आंख नम है। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारियों ने अस्पताल और मौके का मुआयना किया है।
ग्रामीण अब इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि इस वीभत्स लापरवाही के असली गुनहगारों पर कब और क्या कार्रवाई होती है, ताकि भविष्य में किसी और का घर इस तरह न उजड़े।
बिजली विभाग पर उठ रहे सवाल
यह घटना बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़ी करती है। क्या ताजिया के रूट पर कोई निरीक्षण किया गया था? क्या बिजली विभाग को इस जुलूस के बारे में पहले से पता था?
ये वो सवाल हैं जिनका जवाब बिजली विभाग को देना होगा। अगर सुरक्षा नियमों का पालन किया जाता, तो शायद यह हादसा नहीं होता।
प्रशासन का बयान
एएसपी राकेश पांडरो ने बताया कि करंट की चपेट में आए लोगों का मेडिकल कॉलेज में इलाज जारी है। घटना के हर पहलू को देखा जा रहा है और इस पूरे मामले की विस्तृत जांच की जा रही है।
उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि इस हादसे के लिए कौन जिम्मेदार है और किसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
पीड़ित परिवारों का दर्द
हादसे में मारे गए लोगों के परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। कुछ ही पलों में उनके घर के चिराग बुझ गए। गांव में मातम का माहौल है।
लोग प्रशासन से पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं। सरकार को इस दुखद घटना में पीड़ितों के साथ खड़ा होना चाहिए।