राजधानी भोपाल में रेंटल कारों के नाम पर चल रहे करोड़ों रुपये के बड़े फर्जीवाड़े का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। इस मामले ने शहर में वाहन मालिकों और रेंटल कारोबार से जुड़े लोगों में हड़कंप मचा दिया है।
लोग अतिरिक्त कमाई के लालच में अपनी कारें किराए पर देते थे, लेकिन इसी भरोसे को हथियार बनाकर एक संगठित गिरोह ने करोड़ों रुपये का खेल कर दिया। यह गिरोह काफी शातिराना तरीके से काम करता था।
31 गाड़ियां बरामद, कीमत साढ़े तीन करोड़
यह पूरा मामला भोपाल के अरेरा हिल्स थाना क्षेत्र से सामने आया, जहां पुलिस ने जांच के दौरान अब तक 31 कारें बरामद की हैं। बरामद की गई गाड़ियों की कुल कीमत करीब साढ़े 3 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
इन गाड़ियों में थार, होंडा सिटी और डिजायर जैसी कई लग्जरी और हाई-एंड कारें भी शामिल हैं। यह सभी कारें किराए के नाम पर ली गई थीं।
ऐसे चल रहा था फर्जीवाड़ा
पुलिस जांच में सामने आया कि यह गिरोह पहले कारों को रेंटल के नाम पर किराए पर लेता था। इसके बाद गाड़ियों का जीपीएस सिस्टम बंद कर दिया जाता था ताकि उनकी लोकेशन ट्रैक न की जा सके।
फिर इन गाड़ियों को गांव और देहात के इलाकों में ले जाकर बेहद कम कीमत पर, यानी लगभग 75 हजार रुपये एडवांस लेकर गिरवी रख दिया जाता था। इस तरह कार मालिकों को कुछ पता नहीं चलता था।
एक शिकायत से खुला पूरा राज
इस पूरे मामले का खुलासा विदिशा निवासी गौरव कुशवाहा की शिकायत से हुआ। उनकी शिकायत के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की और धीरे-धीरे पूरे सिंडिकेट की परतें खुलने लगीं।
जांच में यह भी सामने आया कि यह कोई छोटा-मोटा मामला नहीं बल्कि एक संगठित नेटवर्क है। पुलिस ने जितनी गहराई से खंगाला, उतने ही और खुलासे हुए।
मास्टरमाइंड कौन है?
पुलिस के अनुसार इस पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड शैलेश जोशी है। आरोप है कि उसने सबसे पहले गौरव कुशवाहा की स्विफ्ट डिजायर कार को 25 हजार रुपये मासिक किराए पर लिया था।
गाड़ी मिलते ही उसने उसका जीपीएस सिस्टम बंद कर दिया और उसे ट्रैकिंग से बाहर कर दिया। इसके बाद उसने इसी तरीके से अन्य कारों को भी ठिकाने लगाया।
कैसे लगाते थे गिरवी?
आरोप है कि गाड़ियों को शहर से बाहर ले जाकर गिरवी रखा गया और फिर उन्हें अलग-अलग जगहों पर बेच दिया गया। किराए के नाम पर ली गई गाड़ियां कुछ ही दिनों में गायब कर दी गईं।
इस पूरे नेटवर्क में कई एजेंट शामिल थे, जो कारों को किराए पर लेने का काम करते थे। वे मालिकों को भरोसा दिलाते थे और फिर गाड़ी गायब कर देते थे।
पहले भी आ चुके हैं ऐसे मामले
भोपाल में इस तरह के वाहन फर्जीवाड़े पहले भी सामने आ चुके हैं, लेकिन इस बार 31 गाड़ियों की बरामदगी ने इस नेटवर्क की गंभीरता को उजागर कर दिया है।
यह पहली बार है जब इतनी बड़ी संख्या में कारें एक साथ बरामद हुई हैं। पीड़ित लंबे समय तक अलग-अलग थानों में शिकायत करते रहे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।
अरेरा हिल्स पुलिस ने संभाला मामला
पीड़ित लंबे समय तक अलग-अलग थानों में शिकायत करते रहे, लेकिन बाद में अरेरा हिल्स पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लिया। पुलिस ने बीएनएस की धारा 316(2) के तहत एफआईआर दर्ज की है।
फिलहाल मुख्य आरोपी शैलेश जोशी फरार बताया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि उसकी तलाश की जा रही है और जल्द ही पूरे गिरोह को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
कई और कारों की तलाश
जांच में यह भी सामने आया है कि इस गिरोह ने अपने एजेंटों के जरिए कई और कारें किराए पर ली थीं और उन्हें भी इसी तरह ठिकाने लगाया गया था।
पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े एजेंटों और उन लोगों की भी तलाश कर रही है, जिन्होंने इन गाड़ियों को खरीदा या गिरवी रखा। संभावना है कि और गाड़ियां बरामद होंगी।
तीन राज्यों में फैला नेटवर्क
फिलहाल एमपी, हरियाणा, उत्तराखंड और यूपी से बरामद गाड़ियों को अरेरा हिल्स थाने में खड़ा किया गया है। इतनी बड़ी संख्या में गाड़ियों के जमा होने से थाने में जगह की भी कमी हो गई है।
यह बताता है कि यह गिरोह कितना बड़ा और संगठित था। पुलिस अब पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है।
आम लोगों को सतर्क रहने की जरूरत
इस मामले ने रेंटल कार देने वाले लोगों को सतर्क कर दिया है। जरूरी है कि लोग अपनी गाड़ी किराए पर देने से पहले किरायेदार की पूरी जांच करें।
इसके अलावा, कार में GPS ट्रैकर लगाना और समय-समय पर उसकी लोकेशन चेक करना भी बेहद जरूरी है। ऐसे फ्रॉड से बचने के लिए सावधानी ही सबसे बड़ा हथियार है।