बॉलीवुड डीवा करिश्मा कपूर की सीरीज ‘ब्राउन’ ZEE5 पर स्ट्रीम हो चुकी है। इसमें एक्ट्रेस लेडी कॉप के रोल में हैं। साइकोलॉजिकल थ्रिलर के दीवानों के लिए यह सीरीज काफी एक्साइटिंग है।
फैंस की फेवरेट लोलो (करिश्मा कपूर) इस बार एक दमदार किरदार के साथ आई हैं। आइए जानते हैं कि क्राइम थ्रिलर शोज की कड़ी में नई आई करिश्मा की ‘ब्राउन’ कितनी अलग और देखने लायक है।
किस पर बेस्ड है सीरीज?
2016 में आई अभिक बरुआ की नॉवेल ‘सिटी ऑफ डेथ’ पर बेस्ड यह शो डायरेक्टर अभिनय देव ने बनाया है। यह 7 एपिसोड की सीरीज है, जो पुलिस इन्वेस्टिगेशन और ब्रूटल मर्डर मिस्ट्री पर आधारित है।
नॉवेल पहले से ही क्राइम थ्रिलर फैंस के बीच काफी पॉपुलर थी। उस पर बनी सीरीज को लेकर दर्शकों में काफी उत्सुकता थी।
कहानी क्या है?
कोलकाता के एक रसूखदार परिवार की बेटी की दर्दनाक हत्या से शो शुरू होता है। सिर से धड़ अलग कर पीड़िता को मौत के घाट उतारा गया है। पूरे कोलकाता में सनसनी फैली है।
पुलिस पर मीडिया और राजनीतिक दलों का दबाव है। ऐसे में केस की कमान रीटा ब्राउन (करिश्मा कपूर) को दी जाती है। रीटा के साथ इस केस पर अर्जुन सिन्हा (सूर्या शर्मा) काम करता है।
रीटा ब्राउन की पर्सनल लाइफ भी नहीं है आसान
अपनी पर्सनल लाइफ के ट्रॉमा की वजह से रीटा डिप्रेशन और एल्कोहल से जूझ रही है। वह अतीत की यादों में डूबी रहती है। केस पर काम करते हुए उसे भी अग्निपरीक्षा से गुजरना पड़ता है।
कहानी में असली सस्पेंस तब आता है जब एक और लड़की की निर्मम हत्या हो जाती है। रीटा इस मर्डर मिस्ट्री को सुलझाते हुए दिल दहला देने वाले सदमे और दर्द से गुजरती है।
करिश्मा कपूर की एक्टिंग ने किया दमदार
करिश्मा कपूर के टैलेंट पर हर किसी को भरोसा है। कोई भी रोल हो, वह हर किरदार में अपना बेस्ट ही देती हैं। रीटा ब्राउन के किरदार को उन्होंने बखूबी निभाया है।
वह हर इमोशन को स्क्रीन पर दिखाने में कामयाब रही हैं। इस रोल को करिश्मा ने पूरी तरह नॉन-ग्लैमरस और नो-मेकअप लुक के साथ प्ले किया है। यह उनके करियर का एक अलग अवतार है।
सूर्या शर्मा और बाकी कलाकारों का प्रदर्शन
सूर्या शर्मा ने इंस्पेक्टर अर्जुन सिन्हा के रोल में अच्छा काम किया है। वह करिश्मा को कॉम्प्लीमेंट करते नजर आते हैं। उनकी स्क्रीन प्रेजेंस अच्छी है।
सोनी राजदान ने करिश्मा की मां का रोल किया है। वह जब भी स्क्रीन पर दिखीं, अच्छी लगीं। जीशू सेनगुप्ता ने साइकेट्रिस्ट संदीप चक्रवर्ती के रोल में बैलेंस एक्ट किया, हालांकि उनका रोल थोड़ा और दमदार लिखा जा सकता था।
हेलन का छोटा पर प्रभावशाली रोल
हेलन ने करिश्मा की रिलेटिव बर्था का रोल किया है। वह जब भी दिखीं, सीन में फन वाइब एड करती नजर आईं। उनकी परफॉर्मेंस सीरीज में एक ब्रेथ ऑफ फ्रेश एयर की तरह है।
बाकी कलाकारों ने भी अपने पार्ट को अच्छे से प्ले किया है। सिंगर शान भी इस सीरीज में कैमियो रोल में हैं, जो एक अच्छा सरप्राइज है।
कहां रही कमी?
सीरीज थोड़ी स्लो पेस में है। ब्राउन जैसे साइकोलॉजिकल और क्राइम थ्रिलर में निर्माताओं की सबसे बड़ी जीत तब होती है, जब आखिर तक खूनी का पता न चले। लेकिन ब्राउन में यह कोशिश विफल रही है।
क्लाइमैक्स से पहले ही पता लग जाता है कि निर्मम हत्याएं करने वाला खूनी कौन है। यह इस शो का सबसे बड़ा कमजोर पक्ष है। स्क्रीनप्ले धीमा है और एपिसोड लंबे खिंचे हुए लगते हैं।
सिनेमैटोग्राफी और बैकग्राउंड म्यूजिक
सिनेमैटोग्राफी अच्छी है। कोलकाता की तंग गलियों, डार्कनेस और दुर्गा पूजा की वाइब को कैमरे पर खूबसूरती से दिखाया गया है। यह सीरीज का एक प्लस पॉइंट है।
बैकग्राउंड म्यूजिक कहानी के पेस के साथ मैच करता है। संगीत ने सस्पेंस को बनाए रखने में मदद की है, लेकिन कहानी में ऐसे मोड़ कम हैं जो दर्शकों की सांसे रोक दें।
क्यों देखें यह सीरीज?
क्राइम थ्रिलर के चाहने वालों के लिए ‘ब्राउन’ एक बार देखने लायक है। अगर आप करिश्मा कपूर के फैन हैं, तो यह सीरीज आपके लिए जरूरी है।
एक्ट्रेस ने पूरा शो अपने कंधों पर चलाया है। उन्हें कॉप अवतार में देखना अपने आप में एक अलग अनुभव है। उनके परफॉर्मेंस के दम पर ही सीरीज देखी जा सकती है।
क्या यह सीरीज वन टाइम वॉच है?
‘ब्राउन’ को एक बार जरूर देखा जा सकता है, खासकर अगर आप करिश्मा कपूर को पसंद करते हैं। हालांकि, प्रेडिक्टेबल क्लाइमैक्स और धीमी कहानी के कारण यह सीरीज बार-बार देखने लायक नहीं है।
अगर आप तेज रफ्तार वाली क्राइम थ्रिलर देखने के आदी हैं, तो यह शो आपको कहीं न कहीं निराश कर सकता है। लेकिन अगर आप करिश्मा के परफॉर्मेंस के लिए देख रहे हैं, तो यह सीरीज आपको निराश नहीं करेगी।
कुल मिलाकर क्या राय है?
‘ब्राउन’ एक ऐसी सीरीज है, जो अपने लीड एक्टर के दमदार परफॉर्मेंस से तो अपेक्षाओं पर खरी उतरती है, लेकिन अपनी कहानी और स्क्रीनप्ले के मामले में कमजोर पड़ जाती है। करिश्मा कपूर ने रीटा ब्राउन के किरदार में जान फूंक दी है।
लेकिन स्लो पेस और पहले से अंदाजा लग जाने वाला क्लाइमैक्स इस शो की कहानी के प्रभाव को कम कर देता है। अगर मेकर्स स्क्रीनप्ले पर थोड़ा और ध्यान देते और सस्पेंस को बरकरार रखते, तो यह सीरीज शानदार बन सकती थी।