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मध्य प्रदेश

आकांक्षा सुसाइड केस: बेटी को पढ़ाने पिता बन गए थे रसोइया, क्रेडिट कार्ड से लिया 3 लाख लोन

SMW NEWS BUREAU
Last updated: 04/06/2026 9:11 PM
By SMW NEWS BUREAU 8 Min Read
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मध्य प्रदेश के नवगठित जिले मऊगंज से एक झकझोर कर रख देने वाली खबर सामने आई है। यहां के मगनिया गांव की रहने वाली नीट परीक्षा की तैयारी कर रही एक होनहार छात्रा आकांक्षा उर्फ स्नेहा चतुर्वेदी ने पेपर लीक होने के चलते डिप्रेशन में आकर फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली।

Contents
पिता ने उठाई लाखों की कर्ज की चूल650 अंक की थी उम्मीदपेपर लीक ने तोड़ी कमर20 मई को रच दी थी दर्दनाक घटनासुसाइड नोट ने बयां किया दर्दपरिवार के आरोप: सरकार नहीं पहुंचीNSUI ने बंधाया ढांढस और दी आर्थिक मददराहुल गांधी से मिलवाने का भरोसायह सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं हैक्या सरकार इस पर गंभीर है?आकांक्षा का सपना अधूरा रह गया

इस घटना ने एक गरीब किसान परिवार के डॉक्टर बेटी पाने के सपने को हमेशा के लिए तोड़ दिया है। आकांक्षा के पिता कृष्ण कुमार चतुर्वेदी गांव में किसानी करते थे, घर की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी, लेकिन बेटी को डॉक्टर बनाने का सपना पूरे परिवार की आंखों में था।

पिता ने उठाई लाखों की कर्ज की चूल

बेटी की पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए पिता ने बैंक से किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के जरिए 3 लाख रुपये का लोन लिया। इसके बाद वे आकांक्षा को तैयारी कराने के लिए नागपुर के एक निजी कोचिंग संस्थान ले गए।

वहां बेटी की पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए पिता खुद एक कुक (रसोइया) की नौकरी करने लगे। एक पिता ने अपनी बेटी के सपने के लिए अपना गुरूर, अपनी इज्जत सब कुछ दांव पर लगा दिया। उनके लिए बेटी की पढ़ाई सबसे बड़ी थी।

650 अंक की थी उम्मीद

नीट का पेपर होने के बाद पूरे परिवार को पूरा भरोसा था कि इस बार आकांक्षा का चयन हो जाएगा और वह डॉक्टर बन जाएगी। आकांक्षा को भी परीक्षा में 650 अंक आने की पूरी उम्मीद थी।

उसने अपनी मेहनत से वह मुकाम हासिल कर लिया था जो बहुत कम लोग कर पाते हैं। वह पढ़ने में होनहार थी और उसके अंक भी अच्छे आने वाले थे। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।

पेपर लीक ने तोड़ी कमर

नीट परीक्षा के बाद जब देश भर में पेपर लीक और धांधली की खबरें सामने आईं, तो आकांक्षा गहरे मानसिक तनाव और डिप्रेशन में चली गई।

उसे लगा कि इतनी मेहनत और परिवार के कर्ज में डूबने के बाद भी इस धांधली के कारण उसका भविष्य अंधकार में है। वह रात-दिन यही सोचती रही कि अब क्या होगा। उसकी पढ़ाई, उसके पिता का कर्ज, सब बेकार चला गया। इसी डिप्रेशन के चलते उसने यह कदम उठा लिया।

20 मई को रच दी थी दर्दनाक घटना

बीते 20 मई को आकांक्षा ने अपने घर में लगे पंखे से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इस आत्मघाती कदम से पूरे परिवार की खुशियां मातम में बदल गईं।

परिवार वालों ने कभी सोचा भी नहीं था कि आकांक्षा ऐसा कदम उठाएगी। वह तो हमेशा खुश रहती थी, उसके चेहरे पर मुस्कान रहती थी। लेकिन अंदर ही अंदर वह टूट चुकी थी, जो कभी किसी को दिखाई नहीं दी।

सुसाइड नोट ने बयां किया दर्द

आत्महत्या वाले स्थान से पुलिस को आकांक्षा का एक बेहद भावुक सुसाइड नोट बरामद हुआ है। इस पत्र में उसने अपने माता-पिता के संघर्ष और अपनी बेबसी को बयां किया है।

उसने लिखा, ‘मम्मी-पापा, आपको पूरा भरोसा था कि मेरी बेटी पढ़ लेगी और डॉक्टर बनेगी। पर अब दोबारा NEET का पेपर देने की मुझमें हिम्मत नहीं है। मैंने आप दोनों को बर्बाद कर दिया। अगर दोबारा पेपर होता भी है, तो वह अच्छा जाएगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है।’

परिवार के आरोप: सरकार नहीं पहुंची

इस भयानक त्रासदी के बाद पीड़ित परिवार का आरोप है कि अभी तक सरकार का कोई भी प्रशासनिक अधिकारी या जनप्रतिनिधि उनके घर संवेदना व्यक्त करने या मदद के लिए नहीं पहुंचा है।

परिवार के अनुसार, उनकी बेटी चली गई, लेकिन सरकार ने अब तक इस गंभीर मामले को गंभीरता से नहीं लिया है। आकांक्षा अकेली नहीं है, ऐसे हजारों छात्र हैं जिनका भविष्य पेपर लीक की वजह से अधर में लटक गया है।

NSUI ने बंधाया ढांढस और दी आर्थिक मदद

इस बीच छात्र संगठन NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़, प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष चौकसे और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विपिन वानखेड़े सहित एक प्रतिनिधिमंडल पीड़ित परिवार के घर मगनिया गांव पहुंचा।

कांग्रेस नेताओं ने दुखी माता-पिता को ढांढस बंधाया और संगठन की तरफ से 2.5 लाख रुपये की आर्थिक मदद का लिफाफा सौंपा। यह राशि भले ही उनके दर्द को कम नहीं कर सकती, लेकिन यह उनके साथ खड़े होने का एक प्रयास है।

राहुल गांधी से मिलवाने का भरोसा

प्रतिनिधिमंडल ने पीड़ित परिवार को भरोसा दिया है कि वे जल्द ही उनकी बात कांग्रेस नेता राहुल गांधी से कराएंगे और उन्हें हर संभव कानूनी और सामाजिक मदद दिलाएंगे।

परिवार के लिए यह सिर्फ एक सांत्वना है, लेकिन आकांक्षा को वापस लाना संभव नहीं है। उसके जाने से परिवार में जो शून्य आया है, वह कभी भरा नहीं जा सकता।

यह सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं है

आकांक्षा सिर्फ एक छात्रा नहीं थी। वह उस हजारों-लाखों छात्रों की प्रतिनिधि थी, जिनका भविष्य पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली की धांधली के कारण अधर में लटक गया है।

यह हर उस छात्र की कहानी है जिसने रात-रात भर जगकर पढ़ाई की, जिसके माता-पिता ने अपनी आखिरी कमाई उसकी पढ़ाई में लगा दी, लेकिन सिस्टम की खराबी के कारण उसकी मेहनत बेकार चली गई। यह वही सिस्टम है जो हर साल पेपर लीक की घटनाओं को अंजाम देता है, लेकिन जिम्मेदारों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करता।

क्या सरकार इस पर गंभीर है?

नीट पेपर लीक कोई नई बात नहीं है। हर साल ऐसी खबरें आती हैं। लेकिन हर बार आरोपी पकड़ में नहीं आते या फिर बाइल पर छूट जाते हैं।

सवाल उठता है कि क्या सरकार इस मामले में गंभीर है? क्या वह उन आरोपियों को पकड़ सकती है जिनके कारण एक मासूम बेटी ने आत्महत्या कर ली? क्या वह परीक्षा प्रणाली में सुधार कर सकती है ताकि भविष्य में ऐसा न हो? ये वो सवाल हैं जिनका जवाब सरकार को देना होगा।

आकांक्षा का सपना अधूरा रह गया

आकांक्षा का एक ही सपना था – डॉक्टर बनना। उसने अपने पिता को अपने लिए रसोइया बनते देखा, उसने अपने परिवार को तंगहाली में जूझते देखा, लेकिन उसने कभी हार नहीं मानी।

उसने अपनी पढ़ाई जारी रखी, नीट की तैयारी की, और परीक्षा भी अच्छी दी। लेकिन उसे हराने वाली परीक्षा नहीं थी, उसे हराने वाली वह सिस्टम थी जहां पेपर लीक होते हैं, जहां धांधली होती है, और जहां बेटियों के सपनों का गला घोंट दिया जाता है।

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