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मध्य प्रदेश

MP: 14 महीनों में 149 तेंदुओं की मौत, 31% सड़क हादसों में, RTI में चौंकाने वाला खुलासा

SMW NEWS BUREAU
Last updated: 11/04/2026 3:47 PM
By SMW NEWS BUREAU 3 Min Read
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31% मौतें सड़क हादसों में, 19 तेंदुओं की जान हाईवे पर गई, 24% बुढ़ापे और बीमारी से, 21% आपसी संघर्ष में, वन विभाग बोला- 4% मृत्यु दर स्वीकार्य सीमा में

Contents
कैसे हुई मौतें?मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा तेंदुओं की आबादीवन विभाग का बचाव (Forest Department’s Defense)एक्टिविस्ट का आरोप (Activist’s Allegation)वन विभाग ने बताए उपाय (Measures Being Taken)

मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में तेंदुओं (leopards) की मौत को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 (RTI) के तहत मिली जानकारी के अनुसार, जनवरी 2025 (January 2025) से 14 महीनों (14 months) में राज्य में 149 तेंदुओं (149 leopards) की मौत दर्ज की गई है।

कैसे हुई मौतें?

डेटा के मुताबिक, सबसे ज्यादा 31% (31 percent) मौतें सड़क हादसों (road accidents) में हुईं। इनमें से 19 तेंदुओं (19 leopards) की जान हाईवे (highway) पर गई।

  • 24% (24%) मौतें बुढ़ापे और बीमारी (old age and illness) से
  • 21% (21%) मौतें आपसी संघर्ष (mutual conflict) में
  • 14% (14%) मौतें शिकार या बदले (poaching or revenge) की घटनाओं में
  • 8 तेंदुओं (8 leopards) की मौत बिजली करंट (electric current) से
  • 2 तेंदुए (2 leopards) फंदों (traps) में फंसे
  • करीब 9% (9%) मामलों में कारण अज्ञात (cause unknown)

मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा तेंदुओं की आबादी

फरवरी 2024 में जारी भारत में तेंदुओं की स्थिति 2022 (Status of Leopards in India 2022) रिपोर्ट के अनुसार:

  • मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में देश में तेंदुओं की आबादी सबसे ज्यादा है, जो 3907 (3,907) है।
  • इसके बाद महाराष्ट्र (Maharashtra) और कर्नाटक (Karnataka) का नंबर आता है।
  • राज्य में 2018 में 3421 (3,421) तेंदुओं की गिनती की गई थी।

वन विभाग का बचाव (Forest Department’s Defense)

वन विभाग के अतिरिक्त प्रधान मुख्य संरक्षक (वन्यजीव) एल. कृष्णमूर्ति (L. Krishnamurthy) ने कहा कि राज्य में तेंदुओं की मृत्यु दर (mortality rate) को कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, “हम एक तय रोडमैप (roadmap) के साथ मृत्यु दर को कम करने की कोशिश कर रहे हैं।”

एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी (senior official) ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि 4000 तेंदुओं में से 149 की मौत (4% – 4 percent) मंजूर करने लायक (acceptable) है। उनके अनुसार, ‘कैट फैमिली’ (cat family) में सालाना 10 से 20 प्रतिशत (10-20%) तक का नुकसान सामान्य माना जाता है।

एक्टिविस्ट का आरोप (Activist’s Allegation)

RTI अर्जी दाखिल करने वाले एक्टिविस्ट (activist) अजय दुबे (Ajay Dubey) ने कहा कि ये आंकड़े एक गंभीर सच्चाई दिखाते हैं। उन्होंने कहा, “टाइगर स्टेट (Tiger State) तेंदुओं के लिए एक कब्रिस्तान (graveyard) बन गया है।”

उन्होंने आरोप लगाया कि:

  • NTCA (National Tiger Conservation Authority) के प्रोटोकॉल को लागू करने में सिस्टम की नाकामी
  • सुरक्षित रास्तों (safe passages) की कमी
  • लीनियर इंफ्रास्ट्रक्चर (linear infrastructure) या बिजली के झटके (electric shock) से जुड़ी मौतों के लिए किसी की कोई जवाबदेही (accountability) नहीं है।

वन विभाग ने बताए उपाय (Measures Being Taken)

वन अधिकारी ने बताया कि मौतों को कम करने के लिए:

  • नई सड़कों पर जानवरों के लिए सुरक्षित रास्ते (safe passages)
  • चेतावनी के संकेत (warning signs)
  • नियमित गश्त (regular patrolling)
  • सड़कों के पास पानी के स्रोत (water sources) न बनाने की सलाह

जैसे उपाय लागू किए जा रहे हैं, क्योंकि जानवर अक्सर पानी की तलाश में सड़कों की ओर आ जाते हैं और दुर्घटनाओं (accidents) का शिकार बन जाते हैं।

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