भारत में ब्रिटिश शासन की नींव रखने वाली ऐतिहासिक ईस्ट इंडिया कंपनी (East India Company) एक बार फिर दिवालिया हो गई है। लंदन में एक लग्जरी रिटेलर के रूप में काम कर रही इस कंपनी को हाल ही में दिवालिया घोषित कर दिया गया। कंपनी के नाम से संचालित वेबसाइट भी अब बंद हो चुकी है और मशहूर लंदन स्थित स्टोर खाली पड़ा है। यह खबर सामने आते ही इतिहास के उस कालखंड की याद ताजा हो गई जब यह कंपनी दुनिया की सबसे शक्तिशाली व्यापारिक संस्था हुआ करती थी।
एक भारतीय उद्यमी का सपना बना असफल
इस कंपनी को साल 2010 में एक बार फिर से नई पहचान दी थी भारतीय उद्यमी संजीव मेहता (Indian Entrepreneur Sanjeev Mehta) ने। 2000 के दशक की शुरुआत में उन्होंने इस कंपनी के अधिकार (Rights) खरीदे थे। उनका सपना था इसे दोबारा एक प्रतिष्ठित ब्रांड के रूप में स्थापित करना।
लंदन के मेफेयर में खुला था स्टोर
संजीव मेहता ने 2010 में लंदन के मशहूर इलाके मेफेयर (Mayfair) में 2,000 वर्ग फीट का एक शानदार स्टोर खोला। यहां प्रीमियम कन्फेक्शनरी, चाय और लग्जरी सामान बेचे जाते थे, जैसा कि मशहूर ब्रांड ‘फोर्टनम एंड मेसन’ में मिलता है।
दिवालिया होने की वजह क्या है?
कंपनीज हाउस (Companies House) में दर्ज फाइलिंग के मुताबिक, ईस्ट इंडिया कंपनी लिमिटेड (East India Company Ltd.) ने पिछले साल अक्टूबर में ही परिसमापक (Liquidator) नियुक्त कर दिए थे। कंपनी पर भारी कर्जा था:
- पैरेंट कंपनी पर बकाया: 6 लाख पाउंड
- टैक्स देनदारी: लगभग 1,93,789 पाउंड
- कर्मचारियों पर बकाया: 1,63,105 पाउंड
इन वित्तीय दबावों के चलते कंपनी दोबारा नहीं उबर पाई और अब इसे पूरी तरह बंद करना पड़ा। 97 न्यू ब्रांड स्ट्रीट स्थित इसका ऐतिहासिक स्टोर भी अब खाली हो चुका है।
एक नजर कंपनी के गौरवशाली इतिहास पर
- स्थापना: 1600 में ब्रिटेन में एक व्यापारिक कंपनी के रूप में हुई।
- पहली मल्टीनेशनल: 1857 तक यह दुनिया की पहली मल्टीनेशनल कॉर्पोरेशन (Multinational Corporation) बन चुकी थी।
- भारत में राज: 1857 के विद्रोह के बाद ब्रिटिश क्राउन (British Crown) ने इसे अपने अधीन ले लिया और इसकी निजी सेना को भंग कर दिया। इसी के साथ भारत में कंपनी के शासन का अंत हो गया था।