JPMorgan CEO Warning: ‘खतरनाक हैं हालात’, जेपी मॉर्गन के सीईओ ने दी चेतावनी, 2008 जैसे संकट की आहटजेपी मॉर्गन चेस के सीईओ जेमी डिमन ने खतरे की घंटी बजाई है। उन्होंने आज के फाइनेंशियल मार्केट की दिशा को लेकर बड़ी बात कह दी है। डिमन ने इसकी तुलना 2008 के वित्तीय संकट से पहले के समय से की है। चेतावनी दी है कि मौजूदा हालात काफी जाने-पहचाने और खतरनाक लग रहे हैं। हाल ही में एक इवेंट में उन्होंने बड़े पैमाने पर उम्मीद और आसान मुनाफे की तस्वीर दिखाई। ये शायद गहरे स्ट्रक्चरल जोखिमों को छिपा रहे हैं।
डिमन ने आज के इन्वेस्टिंग क्लाइमेट की तुलना ग्लोबल फाइनेंशियल मंदी से ठीक पहले के सालों से की। उन्होंने कहा कि उस समय मार्केट में उछाल आया था। मुनाफा आसानी से कमाया जा सकता था। उन्होंने सुझाव दिया कि अजेय होने की वह भावना फिर से उभर रही है।
डिमन ने की ऐसे बर्ताव की आलोचना
डिमन के हवाले से सीएनएन ने बताया, ‘उभरती लहरें सभी नावों को ऊपर उठाती हैं। हर कोई बहुत पैसा कमा रहा था… मुझे नहीं पता कि यह कब तक सभी के लिए अच्छा रहेगा।’
2005-2007 के दौर से तुलना इस चिंता को दिखाती है कि इन्वेस्टर शायद यह कम आंक रहे हैं कि अच्छी स्थितियां कितनी जल्दी बदल सकती हैं। जब मार्केट लगातार ऊपर चढ़ता है तो रिस्क अक्सर बैकग्राउंड में चला जाता है, जब तक कि वह ऊपर न चढ़ जाए।
डिमन ने किसी खास फर्म का नाम नहीं लिया। लेकिन, उन्होंने शॉर्ट-टर्म फायदे के लिए लापरवाह व्यवहार की आलोचना की। उनके अनुसार, कुछ प्लेयर्स सिर्फ यह साबित करने के लिए अजीब स्ट्रैटेजी अपना रहे हैं कि वे मार्केट के बिजनेस में जीत रहे हैं।
पिछले संकट की चीजों की दिलाई याद
जेपी मॉर्गन के चीफ ने सुझाव दिया कि जियोपॉलिटिकल डेवलपमेंट, टैरिफ और तेजी से टेक्नोलॉजिकल बदलाव से पैदा हुई उथल-पुथल के बीच कुछ इंस्टीट्यूशन प्रॉफिट बनाए रखने के लिए एग्रेसिव दांव लगा रहे हैं। उन्होंने इशारा किया कि यह माहौल फायदेमंद व्यवहार हो सकता है जो हालात बदलने पर शायद टिकाऊ न साबित हो।
डिमन ने माना कि उनकी चिंता कहीं ज्यादा है। उन्होंने कहा कि वैसे तो मंदी आखिरकार आएगी। लेकिन, इसका सही कारण अभी भी पक्का नहीं है। एसेट की बढ़ी हुई कीमतें, उन्हें भरोसा दिलाने के बजाय उनकी बेचैनी को और बढ़ा देती हैं। कारण है कि जब सेंटिमेंट बदलता है तो बढ़ी हुई वैल्यूएशन नतीजों को बढ़ा सकती है।
पारंपरिक मार्केट रिस्क के अलावा डिमन ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और इसकी बदलाव लाने वाली ताकत पर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने याद किया कि कैसे एक समय स्थिर मानी जाने वाली इंडस्ट्रीज पिछले बड़े संकट के दौरान हिल गई थीं। इसमें अखबार, यूटिलिटीज और टेलीकॉम कंपनियां शामिल हैं। उन्होंने कहा, ‘इस बार यह एआई की वजह से सॉफ्टवेयर हो सकता है…इसके नीचे टेक्टोनिक प्लेट्स हिल रही हैं, जिससे इंडस्ट्री को चुनौती मिल रही है।’
एआई में रुकावट की चिंताओं ने पहले ही ग्लोबल टेक्नोलॉजी स्टॉक्स को हिला दिया है। हाल ही में हुई बिकवाली तब और बढ़ गई जब एआई फर्म एंथ्रोपिक ने अपने क्लाउड कोवर्क एजेंट के लिए नए प्लग-इन पेश किए। इन्हें लीगल, मार्केटिंग, सेल्स और डेटा एनालिसिस टीमों में काम को ऑटोमेट करने के लिए डिजाइन किया गया था।