भारतीय रुपये ने पिछले ऐतिहासिक निचले स्तर से 10 पैसे की तेजी दिखाते हुए अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ₹91.80 पर कारोबार किया। डॉलर कमजोर होने से रुपये को थोड़ी राहत मिली है, लेकिन मुद्रास्फीति और बाहरी दबाव से यह अभी भी अस्थिर बना हुआ है।
भारतीय रुपये (INR) ने अमेरिकी डॉलर (USD) के मुकाबले 96 घंटे के भीतर गिरावट के बाद थोड़ी मजबूती दिखाई और मंगलवार को शुरुआती ट्रेड में ₹91.80 तक पहुँच गया। इससे पहले पिछले हफ्ते यह एक ऐतिहासिक निचले स्तर पर ₹92.00 तक कमजोर हो चुका था। रुपये को 10 पैसे की मौजूदा रिकवरी मिली है, जो डॉलर सूचकांक (Dollar Index) के कमजोर होने का नतीजा है।
डॉलर की कमजोरी ने दी राहत
मार्केट में डॉलर सूचकांक में गिरावट आई है, जिससे अन्य मुद्राओं को थोड़ी मजबूती मिली है। डॉलर सूचकांक चार-महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया, और रुपए को डॉलर के मुकाबले रिकवर करने में मदद मिली। ऐसे माहौल में ट्रेडर्स ने डॉलर की स्थिति को कम किया, जिससे रुपया लाभ में रहा।
फिर भी दबाव बना हुआ है
हालांकि रुपये ने थोड़ा सुधार दिखाया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक तनाव, कमजोर घरेलू शेयर बाजार, डॉलर की मजबूत मांग और पूंजी बहिर्वाह (capital outflows) जैसे कारक अभी भी रुपए पर दबाव बनाए हुए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, रुपया अभी भी बाहरी जोखिमों और बाजार की अनिश्चितता से प्रभावित रहता है, और यदि इन दबावों में कमी नहीं आती तो यह कमजोर बना रह सकता है।
पिछले स्तरों से तुलना
- शुक्रवार को रुपये ने ₹92.00 तक कमजोरी दर्ज की थी।
- उसके बाद यह वापस ₹91.90 पर बंद हुआ।
- मंगलवार सुबह यह ₹91.80 पर खुला, जिसमें 10 पैसे की मजबूती है।
यह सुधार अल्प अवधि की रिकवरी के रूप में देखा जा रहा है, जबकि डॉलर सूचकांक में कमजोरी और अन्य वैश्विक संकेतों ने रुपये को समर्थन दिया है।