भारत और यूरोपीय संघ के बीच लंबे समय से चली आ रही मुक्त व्यापार समझौते (India-EU FTA) की बातचीत आखिरकार पूरी हो गई है। यह वार्ता साल 2007 में शुरू हुई थी और कई बार रुकावटों के बाद अब जाकर दोनों पक्षों ने इसे अंतिम रूप दे दिया है। इसके व्यापक दायरे और आर्थिक प्रभाव को देखते हुए इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है।
2007 से 2026 तक का लंबा सफर
India-EU FTA की बातचीत 2007 में शुरू हुई थी, लेकिन 2013 के बाद यह ठप पड़ गई थी। करीब एक दशक तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई। जून 2022 में बातचीत दोबारा शुरू की गई और कई दौर की गहन वार्ताओं के बाद अब इस पर सहमति बन पाई है। अधिकारियों के अनुसार, यह समझौता संतुलित है और दोनों पक्षों के हितों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
क्यों कहा जा रहा है ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’
इस समझौते का दायरा बेहद बड़ा है। भारत और यूरोपीय संघ मिलकर दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं और दोनों की संयुक्त आबादी करीब दो अरब के आसपास है। यह समझौता वैश्विक व्यापार के बड़े हिस्से को प्रभावित कर सकता है। इसी वजह से इसे सभी व्यापार समझौतों में सबसे अहम माना जा रहा है।
समझौते में क्या-क्या शामिल
India-EU FTA के तहत वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार, निवेश, डिजिटल ट्रेड, बौद्धिक संपदा अधिकार, विवाद समाधान और नियामक सहयोग जैसे अहम मुद्दों को शामिल किया गया है। इसके तहत दोनों पक्ष कई उत्पादों पर आयात शुल्क घटाने या खत्म करने पर सहमत हुए हैं, जिससे व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।
भारत को क्या फायदा होगा
इस समझौते से भारतीय निर्यातकों को यूरोपीय बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी। कपड़ा, फार्मा, ऑटो कंपोनेंट्स, आईटी सेवाएं और इंजीनियरिंग उत्पाद जैसे सेक्टर को इसका सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, निवेश और तकनीकी सहयोग बढ़ने से रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
आगे की प्रक्रिया क्या है
हालांकि बातचीत पूरी हो चुकी है, लेकिन समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर और कानूनी प्रक्रियाएं अभी बाकी हैं। इसे भारत की कैबिनेट और यूरोपीय संसद की मंजूरी मिलना आवश्यक होगा। इसके बाद ही यह समझौता लागू हो पाएगा।
निष्कर्ष
India-EU FTA भारत और यूरोपीय संघ के रिश्तों में एक नया अध्याय खोल सकता है। 18 साल के इंतजार के बाद इस समझौते का पूरा होना न सिर्फ आर्थिक, बल्कि रणनीतिक तौर पर भी बेहद अहम माना जा रहा है।