फिल्म One Two Cha Cha Chaa की कहानी एक रहस्यमयी बैग के इर्द-गिर्द घूमती है। दो युवा किरदार एक खास बैग को सही जगह पहुंचाने निकलते हैं, लेकिन रास्ते में उनकी मुलाकात ऐसे अजीब-अजीब लोगों से होती है कि पूरा मामला उलझता चला जाता है। इसी कन्फ्यूज़न के बीच एंट्री होती है आशुतोष राणा के किरदार “चाचा” की, जो कहानी को और ज्यादा अराजक और कॉमिक बनाने की कोशिश करता है।
कहानी का मकसद दर्शकों को हंसाना है, लेकिन कई जगह प्लॉट इतना बिखर जाता है कि हंसी की जगह भ्रम पैदा होता है।
निर्देशन और स्क्रीनप्ले
निर्देशन में नीयत साफ दिखती है कि दर्शकों को बिना दिमाग लगाए एंटरटेन किया जाए। हालांकि स्क्रीनप्ले कमजोर पड़ जाता है। कई सीन जरूरत से ज्यादा खींचे गए लगते हैं और कॉमिक पंच बार-बार रिपीट होते हैं। फिल्म को अगर थोड़ी कसावट दी जाती तो इसका असर बेहतर हो सकता था।
अभिनय कैसा है
आशुतोष राणा फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं। गंभीर भूमिकाओं के लिए पहचाने जाने वाले राणा यहां पूरी तरह अलग अंदाज़ में नजर आते हैं। उनका अभिनय कई जगह प्रभावशाली है, लेकिन किरदार की ओवर-एक्सेंट्रिक प्रस्तुति कभी-कभी बोझिल लगती है।
अनंत वी. जोशी और ललित प्रभाकर ने ईमानदार कोशिश की है और कुछ सीन में उनकी कॉमिक टाइमिंग ठीक रहती है। सपोर्टिंग कास्ट ने भी अपने हिस्से का काम निभाया है, लेकिन स्क्रिप्ट की कमजोरी उनके अभिनय पर भारी पड़ती है।
संगीत और तकनीकी पक्ष
फिल्म का संगीत औसत है और कहानी को आगे बढ़ाने में खास योगदान नहीं देता। बैकग्राउंड स्कोर कई जगह ज़रूरत से ज्यादा तेज़ लगता है। सिनेमैटोग्राफी साधारण है और कॉमेडी फिल्मों के लिहाज़ से ठीक-ठाक कही जा सकती है।
क्या फिल्म देखने लायक है
One Two Cha Cha Chaa उन दर्शकों के लिए है जो सिर्फ हल्की-फुल्की, दिमाग न लगाने वाली कॉमेडी देखना चाहते हैं। अगर आप मजबूत कहानी, स्मार्ट कॉमेडी और सधी हुई स्क्रिप्ट की उम्मीद करते हैं, तो यह फिल्म आपको निराश कर सकती है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर One Two Cha Cha Chaa एक औसत कॉमेडी फिल्म है, जिसमें अच्छे कलाकार और कुछ मज़ेदार पल तो हैं, लेकिन कमजोर कहानी और बिखरा हुआ निर्देशन इसे यादगार बनने से रोक देता है। यह फिल्म एक बार टाइमपास के लिए देखी जा सकती है, लेकिन लंबे समय तक याद रहने वाली कॉमेडी नहीं बन पाती।